24 अप्रैल, 2019 को तिरुपति, आंध्र प्रदेश में श्री वेंकटेश्वर पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का अभिभाषण

तिरूपति, आंध्र प्रदेश | अप्रैल 24, 2019

“मैं इस सम्मानित विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करके गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। इस विश्वविद्यालय को देश में राज्य पशुचिकित्सा विश्वविद्यालयों के समूह में गौरव का स्थान प्राप्त है।

पशु चिकित्सा, मत्स्य और डेयरी विज्ञान में उत्कृष्टता के इस केंद्र से स्नातक की डिग्री करने वाले युवा मित्रों को मेरी शुभकामनाएं।

यह दीक्षांत समारोह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि यह आपके करियर की एक नई शुरुआत करता है। आज, आपको डिग्री और पदक दिए जाएंगे जो आपकी कड़ी मेहनत, दृढ़ता, योग्यता और छात्रवृत्ति का प्रमाण हैं।

मैं इस अवसर पर आप सभी को बधाई देता हूं।

उस कठिन परिश्रम और समर्पण का विशेष उल्लेख अवश्य करना होगा जो आपके शिक्षकों ने आपमें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन लाने और आपको सही मायने में उस डिग्री के योग्य बनाने के लिए किया, जो आज आपको प्रदान की जा रही हैं। भारत परमात्मा के सांसारिक रूप में 'गुरु' की पूजा करता है।

मैं स्नातक हो रहे छात्रों के माता-पिता को उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन किए जाने वाले बलिदानों के लिए भी बधाई देना चाहूंगा। यह आपके निस्वार्थ प्यार, समर्थन और विश्वास के कारण है कि आपके बच्चे आज यहां प्रतिष्ठित डिग्री प्राप्त कर रहे हैं, जिस पर आपको गर्व हो रहा है।

मेरे प्यारे युवा मित्रों,

आपने निश्चित ही एक महान पेशा चुना है!

पशु चिकित्सा विज्ञान एक बहु-आयामी विषय है जिसमें पशु रोगों के निदान, नियंत्रण, रोकथाम और उपचार पर अनुसंधान शामिल है और यह मूल प्राणी विज्ञान, जानवरों के कल्याण और देखभाल से भी संबंधित है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पशु विज्ञान की सभी गतिविधियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। बुनियादी स्तर पर पशु चिकित्सा विज्ञान मानव स्वास्थ्य से भी संबंधित गतिविधि है।

पशु चिकित्सा वैज्ञानिक खाद्य सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करके, उभरते हुए संक्रामक रोगों को रोक कर और उन्हें नियंत्रित करके, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करके, गैर-जूनोटिक रोगों का उन्नत उपचार और नियंत्रण करके, सार्वजनिक स्वास्थ्य में योगदान करके और चिकित्सा अनुसंधान में संलग्न होकर मानव स्वास्थ्य की रक्षा और कल्याण करते हैं।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि श्री वेंकटेश्वर पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय देश में पशुपालन में डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू करने वाला पहला विश्वविद्यालय था। मैं समझता हूं कि आपने परा पशु चिकित्सा कर्मचारियों के लिए आवश्यक पाठ्यक्रमों को विकसित करने के लिए अन्य विश्वविद्यालयों के सामने उदाहरण पेश करते हुए नेतृत्व प्रदान किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवाओं को लाभपरक रोजगार मिला है।

यह वास्तव में बहुत गर्व की बात है कि इस विश्वविद्यालय ने महात्मा गांधी के शब्दों "एक राष्ट्र की महानता और उसकी नैतिक प्रगति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां के पशुओं के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है" को अपने आदर्श वाक्य के रूप में चुना है।

वास्तव में, पशुधन हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं। कहा जाता है कि पशु धन राष्ट्रीय धन है।

हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो प्राचीन काल से ही पशुओं को पवित्र मानती रही है। सभी जीवन रूपों के लिए अत्यधिक सम्मान हमारी संस्कृति की एक अमिट पहचान है। प्रकृति और जानवरों के प्रति विशेष श्रद्धा भारतीय लोकाचार की पहचान रही है।

विविध वनस्पतियों और जीवों को एक ही ईश्वरीय सिद्धांत की अभिव्यक्ति माना जाता है जो संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है।

विष्णु के दस अवतारों में मछली, कछुआ और वराह शामिल हैं।

पक्षी और पशु देवताओं और देवियों के वाहन हैं।

कार्तिकेय एक मोर पर, विष्णु एक गरुड़ पर और सरस्वती एक हंस पर सवार होते हैं। कृष्ण को गोवर्धन के रूप में जाना जाता है क्योंकि वह एक ग्वाले हैं जो गायों की रक्षा और उनका पालन-पोषण करते हैं। भगवान शिव को "पशुपतिनाथ" (सभी जानवरों का मुखिया) भी कहा जाता है और उनके आभूषण सर्प और वाहन बैल हैं। गणेश जी एक मूषक और दुर्गा एक बाघ पर सवार होते हैं। हमारे सबसे प्राचीन महाकाव्य रामायण में बंदर, भालू और यहां तक कि गिलहरी भी दैवी लक्ष्य को पाने में मदद करते हैं।

स्पष्ट रूप से, सभी पक्षिओं और पशुओं, बड़े व छोटे, जंगली और पालतू, का महत्व है और सुरक्षा और संरक्षण करने योग्य हैं।

हमारे प्राचीन भारतीय महाकाव्य और समृद्ध मूर्ति कला हमारे ग्रह की जैव विविधता के संरक्षण के लिए हमारी प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।

हमारा यह विश्व दृष्टिकोण मानवता और प्रकृति के बीच सहजीवी संबंध पर आधारित था।

इस परिप्रेक्ष्य में हम उन सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं जो हमने अपने लिए एक विश्व समुदाय के रूप में निर्धारित किए हैं।

वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए पशुओं का उपयोग करते हुए भी हमने सदा उनके कल्याण और उनके प्रति मानवीय व्यवहार को बहुत महत्व दिया है।

मेरे प्यारे छात्रों,

स्वस्थ और मजबूत कृषि क्षेत्र भारत में सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख आधारों में से एक है।

यदि हमें अपनी जनसंख्या की अनुकूल स्थिति से होने वाले लाभ का व्यापक रूप से उपयोग करना है और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना है तो हमें, विशेषकर युवाओं के लिए, कृषि को आर्थिक रूप से व्यवहारिक और वित्तीय दृष्टि से लाभकारी बनाकर खेती को एक आकर्षक कैरियर के अवसर के रूप में बदलना होगा।

सौभाग्य से, आप ग्रामीण स्तर पर कृषक समुदाय से सीधे तौर से जुड़े हुए हैं और कृषि क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) का अनुमान है कि ग्रामीण भारत में अनुमानत: 90.2 मिलियन परिवार ऐसे हैं जो कृषि पर आधारित हैं। इन सभी परिवारों को स्थायी आय की सुविधा प्रदान करना आपका प्रमुख प्रयास होना चाहिए।

पशु उत्पाद और कृषि मूल रूप से जुड़े हुए हैं और दोनों समग्र खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत के कुल जीडीपी में कृषि उद्योग का 17% योगदान है, जिसमें से 27% पशुपालन से आता है।

कुल मिलाकर दुग्ध उत्पादन, मुर्गीपालन और मत्स्य पालन उद्योग देश की जीडीपी में 4.4% का योगदान करते हैं। ये आंकड़े हमारी अर्थव्यवस्था में इन क्षेत्रों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं। वे देश भर में लगभग 16 मिलियन लोगों को रोजगार भी देते हैं।

पशुपालन अधिक समावेशी और टिकाऊ कृषि पद्धति को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यलय (एनएसएसओ) का अनुमान है कि 0.01 हेक्टेयर से भी कम भूमि-स्वामित्व वाले देश के लगभग 23% कृषि परिवारों के लिए पशुधन आय का प्रमुख स्रोत है।

समेकित कृषि पद्धतियां 2022 तक किसान की आय को दोगुना करने में निश्चित रूप से मदद करेंगी। अत: हमारे पशुधन के स्वास्थ्य और उनके बेहतर उत्पादन को सुनिश्चित करना सर्वोपरि है।

पशुधन रखने वाले किसान मौसम की मार और फसलों के नष्ट होने के कारण आने वाले संकट का सामना बेहतर तरीके से कर पाएंगे। वास्तव में, एक अध्ययन से पता चला है कि उन किसानों के परिवारों में आत्महत्याएं नहीं हुईं जिन्होंने मुर्गीपालन, डेयरी या मत्स्य पालन जैसी विविध संबद्ध गतिविधियों को अपनाया।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत 1998 के बाद से दुनिया में दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। मैं इस अभूतपूर्व सफलता को प्राप्त करने के लिए पशु चिकित्सा पेशेवरों और किसानों की सराहना करता हूं। दुग्ध उत्पादन लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए विशेष रूप से सीमांत और महिला किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण द्वितीय स्रोत बन गया है।

मत्स्य-पालन और जलीय कृषि क्षेत्र भारत के कृषि निर्यात का सबसे बड़ा समूह बन कर उभरा है, जो मात्रा के संदर्भ में 10.51 लाख टन और मूल्य के संदर्भ में में 33,442 करोड़ रूपये का है। भारत की लंबी तटरेखा और प्रचुर मात्रा में अंतर्देशीय जल निकायों को देखते हुए, जलीय कृषि और मत्स्य पालन में रोजगार और आर्थिक विकास में योगदान करने की काफी संभावनाएं हैं।

भारत में देशी मवेशियों की एक विशाल जैव विविधता है जो स्थानीय आवासों में सैकड़ों वर्षों से जीवित है। लेकिन दुर्भाग्य से उनकी संख्या घट रही है। इसलिए, हमारी स्वदेशी नस्लों का संरक्षण और उनकी संख्या में सुधार करना समय की मांग है।

मुझे खुशी है कि इस विश्वविद्यालय ने ओंगोल और पुंगनूर की दो महत्वपूर्ण मवेशी नस्लों और भेड़ों की देशी नेल्लोर नस्ल के संरक्षण के लिए उपाय किए हैं। देशी नस्लों को संरक्षित करने और उनकी संख्या में बढ़ोत्तरी करने के लिए यह 15 कृत्रिम (इनविट्रो) फर्टिलाइजेशन केन्द्रों में से एक भी है।

मैं विश्वविद्यालयों से आग्रह करता हूँ कि वे लगातार एक दूसरे के साथ सहयोग करें और मानव संसाधन के विकास, प्रौद्योगिकी संवर्द्धन और किसानों के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान खोजने के लिए उद्योगों के साथ संपर्क विकसित करें।

नेशनल बोवाइन जीनोमिक्स सेन्टर फॉर इन्डीजिनिस ब्रीडस (एनबीजीसी-आईबी) एक ऐसी योजना है जो जीन-आधारित तकनीक का अत्यधिक सटीक उपयोग करके स्वदेशी पशुओं की नस्लों में सुधार का मार्ग प्रशस्त करेगी।

प्रजनन से संबंधित समस्याएं, पशुओं के चारे के संसाधनों में कमी, रोगों की व्यापकता, नई बीमारियों का उभरना, जलवायु अनुकूलन और उत्पत्ति के बाद के संरक्षण और मूल्य संवर्धन के लिए पर्याप्त अवसरंचना की कमी कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

बाजार में किसानों की श्रम उत्पादकता और सौदेबाजी की ताकत में सुधार करने के लिए, पशुधन, डेयरी और मत्स्य उत्पादन क्षेत्रों को कृषि-स्थल पर अधिक मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण की आवश्यकता है।

भारत में पशु चिकित्सकों की आपूर्ति और मांग के एक मात्रात्मक विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में पशु चिकित्सकों की मांग और आपूर्ति के बीच विसंगति है। भारत को 72,000 स्नातक पशु चिकित्सकों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या लगभग 43,000 है। विशाल पशुधन आबादी की देखभाल करने और 50,000 शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विकास, विस्तार और क्षेत्र संस्थानों में पदों को भरने के लिए भारत को कई और पशु चिकित्सकों की आवश्यकता है।

शिक्षाविदों और प्रशासकों से मेरी अपील है कि इन मुद्दों को हल करने के लिए हमारे देश में पशु चिकित्सा शिक्षा प्रणाली का पुनरुद्धार करें और लगातार इसमें सुधार, विस्तार करें तथा इसका नवीनीकरण करें।

सभी पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों और कृषि विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग विभाग और सबसे महत्वपूर्ण आईटी विभाग होने चाहिए ताकि सामान्य रूप से प्रौद्योगिकी तथा विशेष रूप से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) में प्रौद्योगिकी की अनंत संभावनाओं का उपयोग किया जा सके ।

प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर नवोन्मेषों के प्रति ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। मैं आपको ई-पशुहाट का उदाहरण देता हूं, यह एक वेब पोर्टल है जिसे "नेशनल मिशन ऑन बोवाइन प्रोडोक्टिविटी" योजना के तहत शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य प्रजनकों और किसानों का गोजातीय जर्मप्लाज्म की उपलब्धता पर आपस में संपर्क कराना है, इस प्रकार बिचौलियों को हटा दिया जाता है।

ऐसे कई नवाचारों की संभावना है। विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों से नए-नए विचार आने चाहिए।

मेरे प्रिय छात्रो,

आपको नए ज्ञान को प्राप्त करने में और अपनी उन्नति के लिए और साथ ही अपने आसपास के लोगों के कल्याण के लिए भी उसे उपयोग करने में सक्षम होना चाहिए । हमेशा याद रखें कि किसी भी तकनीक या प्रगति का अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन की बेहतरी है।

मैं आपको आपके जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर याद दिलाता हूं कि जब भी पर्यावरण संरक्षण की बात आए तो कभी भी पीछे नहीं हटना ।

हमारी जैव विविधता, हमारे प्राकृतिक आवास, हमारे वन और हमारे महासागर प्राकृतिक संसाधनों के बेपरवाह दोहन और कचरे के बिना सोचे समझे किए जा रहे निपटान के कारण नष्ट हो रहे हैं।

मैं आप सभी से प्रकृति और उसके सभी जीवन रूपों की रक्षा और संरक्षण के कार्य को एक मिशन के रूप में अपनाने का आह्वान करता हूं।

जीवन विज्ञान के छात्रों के रूप में, आप जीवन की प्रकृति को किसी अन्य व्यक्ति की तुलना में बेहतर तरीके से समझते हैं।

मैं आपको अपने ज्ञान को सर्वश्रेष्ठ रूप से उपयोग में लाने के लिए और पर्यावरण को हमने जो नुकसान पहुँचाया है उसके परिणामों को पलटने के लिए अपना सर्वोत्तम प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ।

अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि महात्मा गांधी ने कहा था: "कार्य के प्रति समर्पित व्यक्ति स्वयं को उस पद के योग्य बना लेगा जो उसे दिया गया है"।

मुझे उम्मीद है कि जो डिग्री आज आप प्राप्त कर रहे हैं, स्वयं को उसके और भविष्य में मिलने वाले नेतृत्व के किसी भी पद के लिए योग्य साबित करेंगे।

भविष्य में किए जाने वाले प्रयासों के लिए आप सभी को मेरी शुभकामनाएँ!

धन्यवाद!

जय हिन्द!"