15 अप्रैल, 2019 को नई दिल्ली में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान द्वारा प्रायोजित, लोक प्रशासन में एडवांस प्रोफेशनल प्रोग्राम के 44वें बैच के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | अप्रैल 15, 2019

“मुझे आज आप सभी के साथ बातचीत करके हर्ष की अनुभूति हो रही है।

मुझे खुशी है कि 10 माह के विशिष्ट रूप से तैयार किए गए इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य आपके ज्ञान को नवीनीकृत करना और आपके प्रशासनिक कौशलों को और प्रखर बनाना है।

सिविल और रक्षा,तकनीकी और गैर-तकनीकी प्रतिभागी एक साथ होने से विविध अनुभव और ज्ञान का एक समृद्ध पूल बनता है।

मेरा मानना है कि इस तरह के पाठ्यक्रम नई अंतर्दृष्टि प्रदान करने और प्रशासनिक प्रणाली में सुधार करने के लिए आवश्यक हैं।

आज के तेजी से बदलते राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवेश में नागरिक-केंद्रित प्रशासन समय की मांग है।

लोग एक ऐसा प्रभावी और उत्तरदायी प्रशासन चाहते हैं जो उनकी चिंताओं का पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से शीघ्र समाधान करे।

जैसा कि मैंने एक अन्य संदर्भ में कहा था, हमारे 'स्वराज्य' को 'सुराज्य' अथवा बेहतर, प्रतिक्रियाशील शासन में परिवर्तित करना होगा।

कार्यान्वयन वह प्रमुख तत्व है जिस पर हमें अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।

प्रिय बहनों और भाइयों, प्रशासनिक सुधार एक सतत प्रक्रिया है। हमें आवश्यकताओं के अनुरूप प्रणालियों और प्रक्रियाओं को अद्यतन बनाने और उनमे सुधारने करने की आवश्यकता है। पुरातन कानूनों और प्रक्रियाओं का कोई स्थान नहीं है। इसके लिए एक नई सोच, वर्तमान प्रथाओं की निरंतर समीक्षा और परिवर्तन का सुझाव देने तथा उसे लागू करने का साहस चाहिए।

मुझे यकीन है कि आपकी कार्य स्थिति में आप नई और कठिन चुनौतियों का सामना कर रहे होंगे। इसके साथ ही, प्रत्येक नई स्थिति आपको नए तरीके से सोचने और संसाधनों का इष्टतम उपयोग करके लीक से हटकर समाधान खोजने का अवसर प्रदान करती है।

बेहतर, शीघ्र सेवा परिदान समय की मांग है। किसी भी विकास एजेंडे का उद्देश्य समावेशन, जिन लोगों तक सेवाओं का लाभ नहीं पंहुचा है उन तक सेवाओं का लाभ पहुँचाना और गरीब लोगों का वित्तपोषण होना चाहिए।

निस्संदेह, हमारे देश की नागरिक सेवाएँ दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं। लेकिन इनमे सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।

जैसा कि श्री सरदार वल्लभभाई पटेल, भारत के एकीकरण के सूत्रधार और भारत की फौलादी संरचना के निर्माता, ने कहा था, आपको सेवा भावना से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए। इसमें पेशेवर क्षमता और सतत अधिगम के पहलू भी शामिल किए जाने चाहिए ।

सिविल सेवकों को नई जानकारी और ज्ञान को आत्मसात करना चाहिए, तेजी से बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिवेश के अनुरूप ढलना चाहिए और समकालीन समाज की प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना चाहिए।

आपको भविष्य की तरफ देखना चाहिए।

आपको सक्रिय रूप से यथास्थिति के लिए रचनात्मक विकल्प तलाशने चाहिए।

आज हमें लोगों के साथ संवाद को सुदृढ़ करने और लोगों को राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनाने की आवश्यकता है।

मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप भारत के भीतर और बाहर, गैर-सरकारी और सरकारी दोनों क्षेत्रों की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं को निरंतर सीखते रहें और उन्हें आत्मसात करते रहें। आपको सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना चाहिए, उन्हें आत्मसात करना चाहिए और उन्हें बढ़ाना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है: इस देश में प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि जीवन की गुणवत्ता में एक सुस्पष्ट सुधार हुआ है।

आप जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से आए है और विभिन्न सेवाओं में कार्यरत हैं, लेकिन आप वास्तव में लोक सेवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, ये ऐसी सेवाएँ हैं जिनका आशय लोगों की सेवा करना है।

सभी सिविल सेवा अधिकारियों को एकजुट होकर काम करने तथा अपने विशिष्ट कार्यक्षेत्र अनुभवों और विशेषज्ञता के द्वारा एक-दूसरे का पूरक बनने और एक-दूसरे को समर्थन प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि भारत की विकास गाथा को अति अपेक्षित गति और दिशा मिल सके।

संपूर्ण शासन परिप्रेक्ष्य का मूल बिंदु है कार्यान्वयन और यह कि वितरण तंत्र कितने अच्छे से काम कर रहा है।

हमें निगरानी, मूल्यांकन और निरंतर सुधार की संस्कृति का विकास करना होगा।

सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों को भी और बेहतर बनाने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

मैं उम्मीद करता हूं कि आप सभी प्रबंधकीय नेता के तौर पर हमारी शासन प्रणालियों का सतत आधार पर उन्नयन करते रहेंगे ताकि हम दक्षता और कुशलता के उच्चतर स्तरों को प्राप्त कर सकें।

मैं आप सभी को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

जय हिन्द!"