संपूर्ण शासन परिप्रेक्ष्य का मूल बिंदु कार्यान्वयन है: उपराष्ट्रपति: उपराष्ट्रपति ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के लोक प्रशासन में 44वें उच्च व्यावसायिक कार्यक्रम को संबोधित किया

नई दिल्ली
अप्रैल 15, 2019

पेशेवर क्षमता बनाए रखें और प्रौद्योगिकी को निरंतर सीखने वाले बनें;
सीखते रहें और भारत के भीतर तथा बाहर सर्वोत्तम प्रथाओं को आत्मसात करें;

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि संपूर्ण शासन परिप्रेक्ष्य का मूल बिंदु है कार्यान्वयन और वितरण तंत्र कितने अच्छे से काम कर रहा है। उन्होंने सभी सिविल सेवा अधिकारियों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया और कहा कि उनके विशिष्ट कार्यक्षेत्र अनुभवों के द्वारा एक-दूसरे का पूरक बनने से भारत की विकास गाथा को अतिअपेक्षित गति और दिशा देने में सहायता मिलेगी।

आज यहां भारतीय लोक प्रशासन संस्थान द्वारा प्रायोजित लोक प्रशासन में उच्च व्यावसायिक कार्यक्रम के 44वें बैच को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि वे सक्रिय तौर पर यथास्थिति के लिए रचनात्मक विकल्पों की संभावनाएं तलाशें और लोगों के साथ संवाद को सुदृढ़ करने के लिए कदम उठाएं तथा उन्हें राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनाएं।

यह उल्लेख करते हुए कि कार्यान्वयन सम्पूर्ण शासन परिप्रेक्ष्य का मूल बिंदु है, उपराष्ट्रपति ने निगरानी, मूल्यांकन और निरंतर सुधार की संस्कृति निर्मित करने के लिए उपाय करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, ' बेहतरीन प्रणालियों को भी, बेहतर बनाने की संभावना हमेशा बनी रहती है।'

सरदार वल्लभभाई पटेल, भारत के एकीकरण कर्ता और भारत की फौलादी संरचना के निर्माता, को उद्दृत करते हुए उपराष्ट्रपति ने सरकार के नागरिक और रक्षा, तकनीकी और गैर-तकनीकी विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों को सेवा भावना से मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए कहा।

यह उल्लेख करते हुए कि देश के प्रत्येक नागरिक और व्यक्ति को यह महसूस करना चाहिए कि जीवन की गुणवत्ता में एक सुस्पष्ट सुधार हुआ है, उन्होंने अधिकारियों से आम आदमी की सुविधा के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने, उन्हें अनुकूल बनाने और उन्हें बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों से पेशेवर दक्षता बनाए रखने और लोगों की बेहतर सेवा के लिए प्रौद्योगिकी, नीति और विश्व के निरंतर शिक्षार्थी बनने का भी आह्वान। उन्होंने कहा कि वे भारत के भीतर और बाहर, गैर-सरकारी और सरकारी दोनों क्षेत्रों की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं को निरंतर सीखते रहें और उन्हें आत्मसात करते रहें ।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति के सचिव डा. आई.वी. सुब्बा राव; भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के निदेशक श्री एस.एन. त्रिपाठी; आईआईपीए के कार्यक्रम निदेशक (एपीपीपीए), प्रो. अशोक विशनदास और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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