मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लें: उपराष्ट्रपति: केसरी स्कूलों के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित किया

चेन्नई
अप्रैल 23, 2019

छात्रों को महान स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों से अवगत कराएं;
बालिकाओं को शिक्षित करने जैसे अभियानों को जनांदोलन बनना चाहिए;

उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडु ने लोगों से अपनी मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंंने मातृभाषा के संरक्षण के अभियान को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्य सरकारों से प्राथमिक विद्यालय स्तर तक मातृभाषा को अनिवार्य बनाने का आग्रह किया।

देशी भाषाओं के संरक्षण में अपनी गहरी रुचि व्यक्त करते हुए, उपराष्ट्रपति ने छात्रों को घर पर अपनी मातृभाषा में बोलने की सलाह दी।

श्री नायडु ने आज चेन्नई में केसरी स्कूलों के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित करते हुए शैक्षिक संस्थानों को बच्चों में नवोन्मेष और वैज्ञानिक सोच की भावना पैदा करने की सलाह दी। उन्होंने केसरी स्कूल के एक नए परिसर के निर्माण हेतु आधारशिला भी रखी।

छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए, उपराष्ट्रपति ने विद्यालयों को अध्ययन का एक खुशनुमा माहौल बनाने तथा पाठ्यक्रमों में सुधार कर करके छात्रों को महान स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों से अवगत कराने और उनमें भारतीय मूल्यों को विकसित करने के लिए कहा।

इस बात का अवलोकन करते हुए कि 21 वीं सदी की दुनिया और राष्ट्र की आर्थिक प्रगति की ज्ञान पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्कूगली स्तंर से ही प्रौद्योगिकी के बदलते स्वरूपों की जानकारी छात्रों को दी जानी चाहिए ताकि वे बदलते परिदृश्य के अनुकूल खुद को ढाल सकें।

अपनी राय देते हुए कि सिर्फ साक्षर होना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए,उपराष्ट्रपति ने कहा कि वास्तविक शिक्षा वह है जो व्यक्ति को सत्य, ज्ञान की तलाश करने और तार्किक सोच विकसित करने के साथ दूसरों की जरूरतों को समझने और उनके प्रति संवेदनशील बनाने में सक्षम बनाए।

इस बात की ओर इशारा करते हुए कि शिक्षा को गरीबों, दलितों और पहुँच से दूर तथा समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों के जीवन को बदलने में मदद करनी चाहिए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा गरीबी, लैंगिक असमानता, बेरोजगारी, भेदभाव, जाति और आर्थिक विषमताओं जैसी चुनौतियों का सामना करने का सबसे सक्षम हथियार है।

यह राय देते हुए कि महिलाओं, जो कि आबादी का पचास फीसदी हिस्साज हैं, को समान अवसर मिलने चाहिए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि बालिकाओं और महिलाओं को शिक्षित करना देश की प्रगति के लिए जरूरी है। उन्होंने लोगों से बालिकाओं को शिक्षित करने जैसे अभियानों को जनांदोलन का रूप देने का आह्वान किया।

इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल, श्री बनवारीलाल पुरोहित, कांची के. शंकराचार्य, जगद्गुरु विजयेंद्र सरस्वती, केईएनसीईएस ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ के अध्यक्ष, श्री के. नरसा रेड्डी, केसरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक, श्री एन. गोपालैय्या, स्वर्गीय डॉ.के.एन.केसरी के पौत्र डॉ. के. राधाकृष्णन और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

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