भारत को एक विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है: उप राष्ट्रपति: रेवा विश्वविद्यालय में वास्तुकला खंड का उद्घाटन किया

बेंगलुरु
अप्रैल 22, 2019

उच्च शिक्षा को अधिक न्यायसम्मत और समावेशी बनाने के लिए इसमें सुधार करें;
विद्यार्थियों को नियोजनीय कौशल प्रदान करें;
संस्थानों और उद्योगों के मध्य संपर्क को बढ़ावा दें;

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडु ने कहा है कि एक विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा प्रणाली समय की मांग है। आज बेंगलुरु के कैंपस में अत्याधुनिक वास्तुकला खंड का उद्घाटन करने के पश्चात रेवा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हम श्रंखला के अंतिम चरण तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए अवसरों का सृजन करने में विफल होते हैं तो विकास के लिए भारत के प्रयास अधूरे रह जाएंगे।

यह संकेत करते हुए की उत्कृष्टता और समावेशन के मध्य असंतुलन को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा चुकी हैं उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक न्यायसम्मत और समावेशी बनाने के लिए इसमें सुधार की मांग की

श्री नायडु ने कहा कि हम लोगों में अपार प्रतिभा है और हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विशेष रूप से उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के अवसरों के अभाव के कारण इस प्रतिभा को निष्क्रिय पड़े रहने नहीं दे सकते। उन्होंने उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए हमारी जनसंख्या के कमजोर वर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अपनी कार्यनीति के केंद्र में रखने की मांग की।

यह कहते हुए कि 2030 तक द्रुत औद्योगिकरण और आर्थिक विकास लगभग 250 मिलियन कुशल कार्यबलों के लिए अवसरों का सृजन करेगा, श्री नायडु ने दावा किया कि भारत आने वाले वर्षों में कुशल जनशक्ति के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरेगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के समय से की गई प्रगति के बावजूद भारत में उच्च शिक्षा प्रणाली अपर्याप्त नामांकन, गुणवत्ता के मुद्दों से लेकर समता और अपर्याप्त आधारभूत सुविधाओं का अभाव जैसी बहुत सी कमियों से आज भी जूझ रही है। यह कहते हुए कि अनुसंधान विश्व भर में उच्च शिक्षा प्रणालियों की आधारशिला है, उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा संस्थानों से विद्यार्थियों के लिए एक ऐसे परिवेश का सृजन करने को कहा जिसमें विद्यार्थी नवोन्मेषी और सृजनात्मक बन सके।

यह कहते हुए की उन्नत अनुसंधान भारत की उच्च शिक्षा के लिए आगे का मार्ग है, श्री नायडु ने महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से अपने संस्थानों को नवीनतम प्रौद्योगिकियों से लैस करने और शिक्षण पद्धतियों में नवीनता लाने को कहा।

उपराष्ट्रपति चाहते थे कि उच्च शिक्षा के संस्थान विद्यार्थियों को नियोजनीय कौशल के साथ समपोषित करने पर ध्यान दें। उन्होंने उन्हें विद्यार्थियों को उद्योगों की मांगो के अनुरूप तैयार करने और उन्हें नए युग के कार्यों को करने के लिए प्रशिक्षित करने के लिए अकादमिक संस्थाओं, उद्योग और सरकार के मध्य संपर्क को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने का सुझाव भी दिया।

इस अवसर पर रेवा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ पी श्यामा राजू, रेवा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. वाई. कुलकर्णी, विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) डॉ. एम. धनमजय, विश्वविद्यालय के ट्रस्टी, श्री भास्कर राजू और उमेश राजू तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

Is Press Release?: 
1