भगवान महावीर के जीवन में आधुनिक विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण शिक्षाएं समाई हुई हैं: उपराष्ट्रपति: उपराष्ट्रपति ने भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव को संबोधित किया

हैदराबाद
अप्रैल 17, 2019

जैन धर्म ने भारत के आध्यात्मिक विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया;
प्रकृति के प्रचुर संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर अंकुश लगाएं, संयम बरतें;
शांति प्रगति का आधार है;

भारत के उप राष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडु ने कहा है कि भगवान महावीर का जीवन और जैन धर्म के दर्शन में आधुनिक विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण शिक्षाएं समाई हुई हैं।

हैदराबाद में आज महावीर जयंती के अवसर पर जैन सेवा संघ द्वारा आयोजित भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के दौरान सभा को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे समय के कुछ गंभीर प्रश्नों के उत्तर भगवान महावीर के दर्शन, सिद्धांतों और शिक्षाओ में पाए जा सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भगवान महावीर के अहिंसा,सत्य और सार्वभोमिक सहानुभूति के संदेशों ने नीतिपरायणता और ईमानदारी के पथ को प्रज्वलित किया है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाओं का आध्यात्मिक प्रकाश और नैतिक महत्व सभी को शांति, एकता और पूरी मानवता के लिए उन्नति हेतु प्रयास करने के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान महावीर इस धरती पर अवतरित होने वाले सबसे महान और प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरूओं में से एक थे।

श्री नायडु ने कहा कि जैन धर्म ने भारत के आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और सत्य, अहिंसा तथा शांति के आदर्शों के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को पुष्ट करने में सहायता की है.

भारत की प्रसिद्ध प्राचीन सभ्यता का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अनेक प्रकार से विश्व में अग्रणी था। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सांस्कृतिक राजधानी था, प्रेम, शांति, सहिष्णुता और भाईचारे के सर्वोत्तम मानव मूल्यों का स्थान और गहन ज्ञान और बुद्धिमता का स्रोत, दुनिया के लिए विश्व गुरु था। उन्होंने आगे कहा कि हमें विश्व में नेतृत्व का अपना यथोचित स्थान पुनः प्राप्त करना है।

यह बताते हुए कि हम उतार-चढ़ाव भरे समय में जी रहे हैं, श्री नायडु ने कहा कि विश्व एक ओर आतंकवाद,विद्रोह और गृह युद्ध जैसे हिंसा के विभिन्न रूपों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर संसाधनों के अनियंत्रित दोहन तथा असंतुलित एवं खराब तरीके से आयोजित विकासात्मक कार्यों के परिणामों को झेल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि “हमें या तो अपने जीने का तरीका बदलना होगा अथवा अपने कार्यों के अपरिहार्य परिणामों का सामना करने के लिए तैयार होना होगा।”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ लोग देश और विश्व के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने के लिए आतंकवाद में लिप्त हो रहे हैं। उन्होंने चाहा कि सभी देश आतंकवाद के संकट के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करें। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे शांति का प्रचार और प्रयोग करें क्योंकि यह विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व समय की मांग है।

यह संकेत करते हुए कि सामाजिक व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के रूप में जो भी हमने विरासत में प्राप्त किया है हम केवल उसके संरक्षक है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि “यह हमारा पावन कर्तव्य है कि हम अपनी भावी पीढ़ियों को यह विरासत सर्वोत्तम अवस्था में सुपुर्द करें ताकि जीवन की निरंतरता बाधित न हो।”

श्री नायडु ने लोगों का आह्वान किया कि वे शांति हासिल करने के लिए प्रयास करें और प्रकृति के साथ अपने संबंध को सामंजस्य से परिपूर्ण बनाने में कोई कमी न छोडें।

घटते प्राकृतिक संसाधनों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि “हमें प्रकृति के प्रचुर संसाधनो के अंधाधुंध दोहन पर अंकुश लगाना चाहिए और अपने जीने के तरीके में संयम बरतना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग आत्मचिंतन करें और प्राचीन मूल्यों का पुनः अवलोकन करें तथा अपने समक्ष उत्पन्न समस्याओं के समाधान खोजने के लिए इनमें से सर्वोत्तम की पहचान।

यह कहते हुए कि भारतीय दर्शन प्रकृति के साथ समरसता में रहने में विश्वास करता है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए और प्रकृति के साथ प्रेमपूर्वक रहना सीखना चाहिए।

इस अवसर पर श्री जैन सेवा संघ के अध्यक्ष श्री विनोक कीमती, श्री जैन सेवा संघ के महासचिव श्री योगेश सिंघी, भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के प्रमुख संयोजक श्री अशोक बेरमेंछा श्री जैन सेवा संघ के संयोजक और समन्वयक श्री प्रवीण पांडेय और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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