उपराष्ट्रपति ने विश्व के विभिन्न भागों में निरंतर आतंकवादी हमले होने पर दु:ख व्यक्त किया

बंगलौर
अप्रैल 22, 2019

भारत दु:ख की इस घड़ी में श्रीलंका सरकार और उसकी जनता के प्रति एकजुटता व्यक्त करता है; उपराष्ट्रपति
शिक्षा के व्यावसायीकरण पर चिंता व्यक्त की;
उच्चतर शिक्षा को किफायती और सुगम बनाया जाए;
वैश्विक मानदंडों के अनुरूप अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना समय की जरूरत;
छात्रों को रोजगार योग्य कौशलों से युक्त करने के लिए अपनी उच्चतर शिक्षा में आमूल-चूल बदलाव और सुधार लाने की जरूरत;
उपराष्ट्रपति ने बैंगलौर विश्वविद्यालय के 54वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडु ने विश्व के विभिन्न भागों में निरंतर आतंकवादी हमले होने पर दु:ख व्यक्त किया है और संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते करने, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के सभी स्वरूपों को अपराध करार देने तथा आतंकवादियों व उन्हें आर्थिक सहायता देने वालों तथा धन, हथियारों तक उनकी पहुंच संभव बनाने वाले तथा उन्हें सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने वालों को अलग-थलग करने के लिए विचार-विमर्श करने का आह्वान किया।

श्री नायडु ने विश्व समुदाय से अनुरोध किया कि वह धरती से आतंकवाद की बुराई का खात्मा करने के लिए सम्मिलित कार्रवाई शुरू करे।

बेंगलुरु में आज बैंगलोर विश्वविद्यालय के 54वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए श्री नायडु ने कहा कि अब समय आ गया है कि राष्ट्रीय नीति के तौर पर आतंकवाद भड़काने और उसको प्रोत्साहन देने वाले देशों को अलग-थलग करते हुए विश्व समुदाय आतंकवाद की अमानवीय बुराई से निपटने के लिए सम्मिलित कार्रवाई करे। 'केवल भर्त्सना करना और मुआवजा देना ही पर्याप्त नहीं होगा। हमें आतंकवाद के मूल कारण तक पहुंच कर इस पर काबू पाना होगा और इसके सभी स्वरूपों को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा'।

दुनिया भर में हजारों मासूमों के मारे जाने की ओर संकेत करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शांति के बिना प्रगति बेमानी होगी।

श्रीलंका में हुए बर्बर आतंकवादी हमलों में अनेक मासूम लोगों के मारे जाने पर दुख प्रकट करते हुए श्री नायडु ने कहा कि भारत दुख की इस घड़ी में श्रीलंका सरकार और वहां की जनता के साथ है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उच्चतर शिक्षा को जाति, नस्ल, धर्म और लैंगिक बाधाओं से ऊपर उठना चाहिए। उऩ्होंने कहा कि जहां तक उच्चतर शिक्षा का संबंध है, सामाजिक एकता और लड़के-लड़कियों में समानता का सिद्धांत सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मानदंडों के अनुरूप अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना समय की जरूरत है।

उपस्थित जन समुदाय को भारत की गौरवशाली धरोहर की याद दिलाते हुए श्री नायडु ने कहा कि भारत अतीत के गौरव को फिर से प्राप्त करे और ऑन लाइन पाठ्यक्रमों के विस्तार, मैसिव ओपन ऑन लाइन कोर्सिस (एमओओसी) और दूरस्थ शिक्षा के जरिये उच्चतर शिक्षा के डिजिटाइजेशन जैसी पहलों के माध्यम से ज्ञान के सृजन और प्रसार का कार्य बड़े पैमाने पर करे।

उपराष्ट्रपति ने उच्चतर शिक्षा प्रदान करने वाली संस्थाओं से विविध विशेषज्ञताओं और विषयों के एकीकरण की सुविधा से युक्त इंटरएक्टिव शैक्षणिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहन देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 'उच्चतर शिक्षा प्रणाली युवाओं को इतना समर्थ बनाए कि वे मौजूदा तकनीकी-पूंजीवादी विश्व व्यवस्था और उसकी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को सेवाएं प्रदान कर सकें।'

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान पर आधारित विकास की अवधारणा भारत को अपने जबरदस्त जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने में समर्थ बनाएगी। उऩ्होंने जोर देकर कहा कि ‘स्किल, रीस्किल एंड अनस्किल' की त्रि-आयामी कार्य नीति, साथ ही साथ ‘लर्न, रीलर्न और अनलर्न’ को शामिल करके कौशल आधारित शिक्षा पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि न सिर्फ हमारी संस्थाओं को वैश्विक ज्ञान का केन्द्र बनाने बल्कि छात्रों को रोजगार पाने योग्य कौशलों से संपन्न करने के लिए भी हमारी उच्चतर शिक्षा में आमूल-चूल बदलाव और सुधार किये जाने की जरूरत है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन अनुपात मात्र 27 प्रतिशत है, जबकि अमरीका और चीन में यह क्रमश: 85.8 प्रतिशत और 43.4 प्रतिशत है। इस पर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाने के उपायों का आह्वान किया।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल और बैंगलोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, श्री वजुभाई वाला, बैंगलोर विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो के.आर. वेणुगोपाल, बैंगलोर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, प्रो.बी.के. रवि, बैंगलोर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार (मूल्यांकन) प्रो. सी. शिवराजू, मानद डिग्री से सम्मानित होने वाले विशिष्ट जन,सिंडिकेट के सदस्य, अकादमिक परिषद, आमंत्रित गणमान्य व्यक्ति, संकाय और स्टाफ के सदस्य, छात्र और उनके माता-पिता उपस्थित थे।

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