उपराष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों से कहा कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग करें

श्री सिटी, आंध्र प्रदेश
अप्रैल 23, 2019

उपराष्ट्रपति ने भारतीय विश्वविद्यालयों की निराशाजनक वैश्विक रैंकिंग पर चिंता जताई; उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करने का आह्वान किया;
समरसतापूर्ण समाज के निर्माण के लिए समावेशी विकास अत्यंत जरूरी है;
उपराष्ट्रपति ने आईआईआईटी श्री सिटी के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने युवाओं एवं विद्यार्थियों से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अपने ज्ञान का उपयोग करने को कहा है।

आज आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, श्री सिटी (आईआईआईटी श्री सिटी) के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, श्री नायडु ने युवाओं से राष्ट्र की विभिन्न गंभीर समस्याओं जैसे कि गरीबी, निरक्षरता, जलवायु परिवर्तन, कुपोषण, शहरों एवं गांवों के बीच बढ़ती खाई इत्यादि का समुचित हल निकाल कर समाज में प्रभावशाली योगदान करने को कहा है।

श्री नायडु ने विद्यार्थियों नए मानक तय करने और उन्हें पूरी ईमानदारी, अनुशासन और कड़ी मेहनत से हासिल करने का आह्वान करते हुए उन्हें संतुष्ट होकर न बैठ जाने तथा अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए इष्टतम प्रयास करने की सलाह दी।

यह राय देते हुए कि विश्वविद्यालयों और उत्कृष्टता संस्थानों जैसे कि आईआईटी, आईएसबी, आईआईएम और आईआईआईटी को विद्यार्थियों में नेतृत्व गुण पैदा करने चाहिए, उन्होंने शिक्षण की पद्धतियों में व्यापक बदलाव लाने का सुझाव दिया, ताकि विद्यार्थियों में सीखने की ललक पैदा हो सके। उन्होंने आईआईआईटी श्री सिटी जैसे संस्थानों से विद्यार्थियों को समग्र एवं गुणवत्तापूर्ण उच्चतर शिक्षा मुहैया कराकर वैश्विक मानकों वाले उत्कृष्टता केन्द्र बनने के लिए अथक प्रयास करने को कहा।

उपराष्ट्रपति ने भारत के उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों की निराशाजनक वैश्विक रैंकिंग पर गंभीर चिंता जताते हुए उच्चतर शिक्षा प्रणाली में पूरी तरह से व्यापक बदलाव लाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धतियों और अनुसंधान संबंधी कार्यनीतियों में प्रासंगिक बदलाव लाने में अग्रणी भूमिका निभाने को कहा, ताकि भारत को वैश्विक शिक्षण का केन्द्र बनाया जा सके।

यह अवलोकन करते हुए कि आर्थिक समृद्धि में समान विकास अवश्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए, श्री नायडु ने शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में शहरों और गांवों के बीच बढ़ती खाई को पाटने पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने एक ऐसे समरसतापूर्ण समाज के निर्माण के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी विशेष बल दिया, जंहा समाज के विभिन्न तबकों की पहुंच सृजित संपदा तक हो सके।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अपने समस्त तकनीकी एवं मानव संसाधनों की मदद से अपने-अपने विद्यार्थियों को स्थानीय समाज के साथ मिलकर काम करने और उनके समक्ष मौजूद समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने यह इच्छा भी जताई कि शैक्षणिक संस्थानों को उद्योग जगत एवं सरकार के साथ नियमित रूप से समुचित तालमेल बनाये रखना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को भविष्य के रोजगार के लिए तैयार किया जा सके।

श्री नायडु ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर चालू वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत और वर्ष 2020 में 7.5 प्रतिशत रहने की ओर संकेत करते हुए विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों से यह अपेक्षा की कि वे भारत की विकास गाथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं उच्चतर शिक्षण संस्थानों को भारत की युवा आबादी को रोजगार योग्य कौशल प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का अधिकतम उपयोग करने को कहा।

आईआईआईटी श्री सिटी के शासक मंडल के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास राजू, आईआईआईटी श्री सिटी के निदेशक प्रो. जी. कन्नाबिरन, आईआईआईटी श्री सिटी के प्रबंध निदेशक श्री रवि सन्ना रेड्डी, इस संस्थान के शासक मंडल के सदस्य, संकाय सदस्य, अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण, विद्यार्थी व उनके अभिभावक और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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