22 जनवरी, 2012 को 1130 बजे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री मो. हामिद अंसारी का अभिभाषण राष्ट्र-राज्यों, राष्ट्रीय संप्रभुता, आर्थिक निरंकुशता और समावेशी सांस्कृतिक पहचान के दौर में, आई.आई.सी. के संस्थापकों ने लोक राष्ट्रों (पीपल्स ऑफ नेशन्स) की बात की। तथापि, विगत पांच दशकों के दौरान, इन अवधारणाओं का महत्व परिवर्तित हुआ है।
आर्थिक और सांस्कृतिक वैश्वीकरण से फायदा अधिक और नुकसान कम हुआ है और इससे सेतु पुन: निर्मित किए जाने का आह्वान हुआ है। राजनैतिक मूल्यों के सार्वभौमिकीकरण के संबंध में भी यही बात लागू होती है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर न्याय, लोकतंत्र, मानवाधिकार और सुशासन स्वयं में त्रुटिरहित बने रहते हैं किंतु कतिपय अन्य कारणों से प्राय: इनकी उपेक्षा अथवा परित्याग कर दिया जाता है। बुतरस घाली की यह आकांक्षा कि "सभी के लिए एक संतुलित अभिकल्प तैयार करते समय प्रत्येक की गरिमा बनी रहे" अभी साकार होनी शेष है। |
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उपराष्ट्रपति के संदेश :- मिलाद-उन-नबी के शुभ अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति का बधाई संदेश। और पढ़ें |
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इस साइट को तैयार करने का कार्य राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (एन.आई.सी.) द्वारा किया गया है। इसमें शामिल जानकारी उपराष्ट्रपति सचिवालय, भारत सरकार द्वारा दी गई है। 1024 x 768, सच्चे रंगों में, इण्टरनेट एक्सप्लोरर 6.0 अथवा इसके बाद के संस्करण पर सर्वोत्तम दृश्यमान। |
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