26 सितंबर, 2018 को जयपुर, राजस्थान में होम्योपैथी विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

जयपुर, राजस्थान | सितम्बर 26, 2018

"मुझे इस प्रतिष्ठित संस्थान, जयपुर होम्योपैथी संस्थान के मेघावी विद्यार्थियों के बीच आकर तथा उनके व्यावसायिक करियर के इस महत्वपूर्ण अवसर पर उनकी खुशी और आशा को साझा करके अत्यधिक प्रसन्नता महसूस हो रही है।

मित्रों, नए भारत के भाग्य निर्माताओं, हमारे विद्यार्थियों के बीच पहुँचने का मेरा प्रयास रहा है। आप नए भारत के भाग्य निर्माता हैं। आप हमारे देश के आदर्शवाद, आशा और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह सूचना विस्फोट का युग है और आपको स्वास्थ्य सेवा एवं चिकित्सा क्षेत्र में वैश्विक प्रवृत्तियों की जानकारी है। आपको अपने नए व्यावसायिक जीवन की चुनौतियों एवं अवसरों की जानकारी है। मैं चाहता हूँ कि आप अर्जित ज्ञान और अपने परिवार और अध्यापकों द्वारा सिखाए गए मूल्यों के अनुसार सही विकल्प का चयन करें।

आज एक विशेष अवसर है। जब आप इस विश्वविद्यालय के द्वारा से बाहर कदम रखेंगे, तो याद रखिए कि एक श्रेष्ठ व्यवसाय के सदस्यों के तौर पर समाज के प्रति आपका एक विशेष उत्तरदायित्व है। मैं आशा करता हूँ कि आप उच्चतम स्तर के नीतिपरक और नैतिक मूल्यों को कायम रखेंगे और इस प्रतिष्ठित संस्थान का गौरव बढाएंगे।

मुझे यह जानकर प्रसन्न्ता हुई कि वर्ष 2009-10 में स्थापित यह विश्वविद्यालय होम्योपैथी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक उत्कृष्टता केन्द्र के तौर पर उभरकर सामने आया है। होम्योपैथी में स्नातक डिग्री के अतिरिक्त, आप ऐलोपैथी चिकित्सकों के लिए होम्योपैथी में प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम सहित होम्योपैथी में एम. डी. और पी.एच.डी. कार्यक्रम, एम. एस. सी. जैव प्रौद्योगिकी, जैव-रसायन, फार्मेसी एवं नर्सिंग पाठ्यक्रम भी चलाते हैं।

प्रिय युवा मित्रों, जैसा कि मैंने पहले कहा था, आप इस श्रेष्ठ व्यवसाय में चुनौतीपूर्ण दौर में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे यहां प्रति 1,000 की जनसंख्या पर 1 चिकित्सक है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्धारित अनुमान 1 : 1000 से कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है। ऐसे परिदृश्य में, चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणाली, आयुष विशेष तौर पर अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इस कमी को पूरा कर सकती है।

आज का अवसर और भी विशेष बन जाता है क्योंकि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर प्रारंभ की गई महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के उपरांत युवा स्वास्थ्य सेवा व्यावसायिों के साथ यह मेरा पहला संवाद है। यह सच्चे अर्थों में उपाध्याय जी के लिए उपयुक्त श्रद्धांजलि है, जिन्होंने एकात्म मानवतावाद के प्रसिद्ध दर्शन का प्रतिपादन किया था।

प्रति परिवार 5 लाख रुपए का बीमा कवरेज प्रदान करने वाली इस योजना में द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 10 करोड़ अधिकारविहीन और कमजोर परिवारों को शामिल किया जाएगा।

बहनो और भाईयो,

जैसा कि आप सभी जानते हैं, प्रौद्योगिकी आधारित आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं अत्यधिक मंहगी होती जा रही हैं।

विश्व विकास संकेतकों के अनुसार, भारत में स्वास्थ्य पर किए जाने वाले कुल व्यय में से 30 प्रतिशत व्यय सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा किया जाता है। शेष 70 प्रतिशत व्यय निजी व्यय के माध्यम से पूरा किया जाता है। स्वास्थ्य पर किए जाने वाले घरेलू व्यय में से यह अनुमान लगाया गया है कि लोगों द्वारा स्वास्थ्य सेवा स्थलों पर 95 प्रतिशत व्यय व्यक्ति द्वारा स्वयं वहन किया जाता है, जबकि शेष 5 प्रतिशत बीमा द्वारा वहन किया जाता है।

जहां तक चिकित्सा सेवा पर अपनी ओर से किए जाने वाले व्यय का संबंध है, 52 प्रतिशत व्यय दवाओं पर किया जाता है, 22 प्रतिशत व्यय गैर-सरकारी अस्पतालों में दाखिल किए जाने पर किया जाता है और 10 प्रतिशत व्यय नैदानिक लैबों पर किया जाता है। यह चिंता का विषय है कि कई मामलों में परिवार चिकित्सा उपचार की उच्च लागतों के कारण ऋण के जाल में फंस गए।

महंगी स्वास्थ्य सेवा एक गंभी सामाजिक समस्या है और आयुष्मान भारत योजना समाज के गरीब लोगों तथा जरूरतमंदों के लिए वास्तव में एक वरदान है।

लोग सस्ती स्वास्थ्य देखरेख सेवा चाहते हैं और होम्योपैथी निश्चित तौर पर एक उपयुक्त और महत्वपूर्ण वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली है। ऐसे आंतरिक और दूरस्थ क्षेत्रों में होम्योपैथी के लिए निवरण और नैदानिक उपचार की अत्यधिक संभावना है, जहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपने प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य केन्द्रों में होम्योपैथी उपचार प्रारंभ किया है। केन्द्रीय सरकार के 30 प्रतिशत आयुष चिकित्सालयों में होम्योपैथी उपचार की सुविधा उपलब्ध है।

आज देश मे 2.8 लाख होम्योपैथी चिकित्सक हैं। सामान्य बीमारियों और रोगों के लिए होम्योपैथी उपचार प्राप्त करने के अतिरिक्त होम्योपैथी का प्रयोग आरोग्य और निवारक पद्धति के तौर पर भी किया जा रहा है। होम्योपैथी को मधुमेह, हृदय रोगों, स्ट्रोक्स और जीवन शैली संबंधी अन्य रोगों की जांच और निवारण हेतु भी समाकलित किया गया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सभी चिकित्सा प्रणालियों के लिए मानक विधियों और प्रक्रियाओं की स्थापना करना समय की मांग है और उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में होम्योपैथी और अन्य भारतीय चिकित्सा प्रणालियों की विधियों और प्रकियाओं का मानकीकरण करते हुए उन्हें सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान कर मुख्यधारा में लाने का प्रस्ताव किया गया है।

होम्योपैथी शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता को बनाए रखने तथा उसे मानक रूप प्रदान करने के लिए संसद ने अभी हाल ही में शिक्षा संस्थाओं को विनियमित करने और अनैतिक तत्वों द्वारा इस क्षेत्र की बढ़ती हुई संभावनाओं का दोहन करने पर रोक लगाने के लिए होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक पारित किया है।

इस विधेयक में नई संस्था की स्थापना करने अथवा नया पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए केन्द्रीय सरकार का अनुमोदन अनिवार्य बनाया गया है। यह हम सभी का सामूहिक दायित्व होना चाहिए कि इस मानवीय अध्ययन विषय को लाभ कमाने की इस मानवीय अध्ययन विषय को लाभ कमाने की अनैतिक लालसा द्वारा बदनाम न किया जाए।

आप जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं सहित हम सभी द्वारा चिंता के जिस क्षेत्र का समाधान किया जाना चाहिए, वह है होम्योपैथी औषधियों की गुणवत्ता का नियंत्रण। गुणवत्ता नियंत्रण को सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है और दवा निर्माताओं को बेहतर विनिर्माण प्रक्रियाओं का पालन करना।

यह स्मरण रखा जाना चाहिए कि होम्योपैथी दवाओं की सुरक्षा मुख्यत: उनकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है। हालांकि, होम्योपैथी दवाएं दिए जाने पर प्राय: तनुकृत हो जाती हैं, परंतु स्रोत सामग्री की अशुद्धताओं और किसी संदूषण को दूर करने के लिए उनका सुरक्षा मूल्यांकन सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

मुझे बताया गया है कि सरकार द्वारा आयुष दवाओं के लिए एक केन्द्रीय औषधीय सह सतर्कता योजना तैयार की जा रही है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण की निगरानी करना है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में न्यूनतम एक परीक्षण और दवा विनिर्माण सुविधा का होना आवश्यक है।

दवाओं के गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण के अभाव में, सस्ती स्वास्थ्य सेवा के इस उभरते हुए क्षेत्र में लागों का विश्वास समाप्त हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि होम्योपैथी संस्थाएं और अनुसंधान पषिदें पहल करते हुए ऐसे कार्यों को प्रारंभ करने के लिए महत्वपूर्ण कुशल जनशक्ति तैयार करें।

आज स्वास्थ्य देखरेख प्रणाली के तौर पर होम्योपैथी को 80 देशों में मान्यता प्रदान की गई है इसलिए नई खोजों और नवाचारी अनुसंधान सहित अपने विषय को और आगे ले जाना आपका सामाजिक और अकादमिक उत्तरदायित्व है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि होम्योपैथी चिकित्सकों ने अपने आंकड़ों का भंडारण करने, उनका विश्लेषण करने और वृहत होम्योपैथ चिकित्सक समुदाय के साथ अपने अनुसंधान को साझा करने के लिए डिजिटल पद्धतियों का सक्रिय रूप से उपयोग किया है।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि यह होम्योपैथी विश्वविद्यालय पी.एच.डी. कार्यक्रम का संचालन करता है और वृहत चिकित्सा समुदाय के साथ अपने अनुसंसान कार्य को साझा करने के लिए पत्र का भी प्रकाशन करता है।

युवा चिकित्सकों और प्रतिष्ठित संकाय संदस्यों,

अपने दीक्षांत समारोह भाषण के अंत में, मैं तैत्तिरीय उपनिषद से एक संदेश उद्धृत करना चाहता हूँ, जो गुरू अपने पाठ्यक्रम के अंत में शिष्यो को देता है : "ईमानदान बनो। अपना कर्म करो। अध्ययन और अधिगम जारी रखो। सत्य और धर्म के मार्ग से मत भटको और समाज के लिए कुछ उपयोगी योगदान करो। उत्कृष्टता का लक्ष्य निर्धारित करो। अपने ज्ञान का संवर्धन करते रहो। अपने ज्ञान का उपयोग करो और इसे अन्य लोगों के साथ साझा करो। भगवान और अपने पूर्वजों का सम्मान करो। अपने माता-पिता, गुरूजनों और अतिथियों में भगवान का रूप देखो। हमेशा अच्छे और बुरे का विश्लेषण करो और उनमें भेद करो। बुराई का परित्याग करो और हमेशा सत्कर्म करो। अपने गुरूजन के जीवन में जो अच्छाई थी उसे ग्रहण करो, किसी अन्य में नहीं। आपको अपने जीवन में उन गुरूजनों से भी बेहतर लोग मिलेंगे, जिनके साथ अपने समय व्यतीत किया है। उनका यथोचित सम्मान करो।" आज के अवसर पर मुझे यह संदेश बिलकुल उपयुक्त प्रतीत होता है।

मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान के विख्यात संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों के लिए उनके व्यावसायिक करियर और उनके व्यक्तिगत प्रयासों में सफलता की कामना करता हूँ।

जय हिन्द!"