26 अप्रैल, 2018 को नई दिल्ली में पोस्टग्रेजुएट इन्स्टिटूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के 8वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | अप्रैल 26, 2018

"देश में श्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों में से एक के दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करना वास्तव में हर्ष का विषय है । विरासत भवन में स्थित यह अस्पताल पिछले 75 वर्षों से लोगों की सेवा कर रहा है। 50 बिस्तरों से शुरूआत करने वाला यह अस्पताल अब 1427 बिस्तर वाले अत्याधुनिक तृतीयक परिचर्या चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है ।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान संस्थान , जिसे 2008 में 28 स्नातकोत्तर सीटों और दो सुपर स्पेशलिटी सीटों के साथ स्थापित किया गया था, अब 160 स्नातकोत्तर और 25 सुपर स्पेशलिटी सीटों वाले संस्थान में विकसित हो चुका है।

मुझे विश्वास है कि आज जो छात्र उत्तीर्ण हो कर जा रहे हैं ,उन्हें इस महान संस्थान में प्रशिक्षण लेने पर गर्व होगा।

शिक्षा और स्वास्थ्य परिचर्या राष्ट्र निर्माण के दो स्तम्भ हैं । चूंकि आपने इस व्यवसाय को चुना है, इसलिए आप पर न केवल 'स्वस्थ भारत बल्कि एक श्रेष्ट भारत' बनाने की एक बड़ी ज़िम्मेदारी है । एक नेक व्यवसाय के सदस्यों के रूप में, आपके द्वारा ली गई हिप्पोक्रेटिक शपथ हमेशा आपके लिए मार्गदर्शक होनी चाहिए । हमेशा नैतिकता और आचार नीति के उच्चतम मानकों को बनाए रखें और उनसे कभी समझौता न करें। आप उन रोगियों के लिए भगवान के समान हैं, जो आपके पास आते हैं । उनके विश्वास को कभी न टूटने दें । हमेशा, उनका धैर्य, सहानुभूति और करुणा के साथ उपचार करें ।

प्रिय छात्रो! भारत ने चिकित्सा क्षेत्र समेत विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है । हालांकि, 70 वर्षों के बाद भी, हमें गरीबी, निरक्षरता, महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार, कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की समस्या, सफाई और स्वच्छता का अभाव, जातिवाद, भ्रष्टाचार और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सुविधाओं का अंतर सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है ।

यद्यपि सरकार सभी को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन शहरी और ग्रामीण ग्रामीण क्षेत्रों के बीच यह अंतर स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में और अधिक गंभीर है ।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, देश को चिकित्सकों, नर्सों और अन्य परा-चिकित्सा कर्मचारियों की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है । सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में उच्च तकनीक वाले और आधुनिक अस्पताल शहरों में स्थित होने के कारण चिकित्सा सुविधाओं का विकास और विस्तार बेहद असंतुलित हो गया है । यद्यपि सरकारें इस समस्या पर ध्यान देती रही हैं, लेकिन सभी हितधारकों से इस स्थिति का समाधान करने और ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त और उचित स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा समेकित प्रयासों की आवश्यकता है । निजी क्षेत्र, गैर –सरकारी संगठनों और चिकित्सकों संगठनों सभी हितधारकों द्वारा इस संबंध में सरकारों के प्रयासों का पूरक बनने की आवश्यकता है।

ग्रामीण इलाकों में जनशक्ति की कमी की समस्या को दूर करने के लिए, मैं सोच रहा हूं कि क्या हमें एमबीबीएस स्नातकों के लिए अपनी पहली पदोन्नति प्राप्त करने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में काम करना अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए। इससे ग्रामीण आबादी को बेहतर चिकित्सा परिचर्या मिल सकेगी और साथ ही चिकित्सकों को ग्रामीण आबादी की स्वास्थ्य परिचर्या संबंधी जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाएगी ।

चिंता का एक अन्य क्षेत्र चिकित्सा परिचर्या की वहनीयता है । यह सच है कि लोगों द्वारा अधिकांश समय चिकित्सा लागतों को फुटकर व्यय से पूरा किया जाता है । अनेक बार, उपचार की उच्च लागत ने असंख्य परिवारों को ऋण के जाल में फंसा दिया है और उन्हें कंगाली की हालत में ला दिया है । सरकार ने हाल ही में बीमा के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने के लिए आयुषमान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना की घोषणा की थी । इस योजना से 10 करोड़ परिवारों के लाभान्वित होने की परिकल्पना की गई है। स्वास्थ्य बीमा की कम पहुंच के दृष्टिगत,मुझे विश्वास है कि आपकी जैसी संस्थाएं सभी को गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य परिचर्या प्रदान करने में ऐसी पहल के लिए नोडल केंद्र के रूप में कार्य करेंगी । एक और प्रमुख पहल में, सरकार ने टी. बी. को खत्म करने की योजना की भी घोषणा की ।

कई राज्य सरकारों ने भी अपनी स्वास्थ्य बीमा योजनाएं तैयार की हैं । अंत में, इनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को सस्ती चिकित्सा परिचर्या के अधिकार से वंचित न किया जाए । जैसा कि मैंने पहले कहा है, निजी क्षेत्र को यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए कि स्वास्थ्य परिचर्या सुलभ और सस्ती हो ।

यह प्रसन्नता की बात है कि सरकार सभी मरीजों को कम लागत और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं भी प्रदान कर रही है और डॉ राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में अमृत फार्मेसी इस दिशा में एक प्रयास है । चूंकि कई मरीज़ दूर दराज के क्षेत्रों और यहां तक कि विभिन्न राज्यों से भी हैं, अस्पताल ने उनके लिए एक धर्मशाला शुरू कर दी है। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि ऐसी कई रोगी-केंद्रित पहलों के अलावा, आप स्वास्थ्य के साथ स्वच्छता और आरोग्य शास्त्र पद्धतियों को जोड़ते हुए प्रधान मंत्री की स्वच्छ भारत पहल को सच्ची भावना से आगे बढ़ा रहे हैं ।

यह नोट करना उत्साहजनक है कि सम्बद्ध डॉ आरएमएल अस्पताल भी रोगी परिचर्या में सुधार करने में लगातार प्रगति कर रहा है। अस्पताल ने मल्टी टेस्ला एमआरआई, न्यू सीटी स्कैन और थोलियम लेजर जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को भी शामिल किया है। निदान और उपचार में सुधार के लिए हमें उन्नत प्रौद्योगिकी की शक्ति का पूर्ण उपयोग करना चाहिए।

जैसा कि मैंने पहले कहा है, आप - चिकित्सक स्वस्थ भारत के लिए स्तम्भ हैं । आप समाज की अकादमिक श्रेष्ठता का हिस्सा हैं और अब जब आप उत्तीर्ण हो कर बाहर निकल रहे हैं, तो पूरे देश को आप से बड़ी उम्मीदें हैं । साथ ही, आपको यह महसूस करना होगा कि यह डिग्री देश द्वारा आप पर किए गए एक विशाल निवेश का लाभांश है। इसलिए, इस संस्थान में आपने जो ज्ञान, कौशल और प्रतिभा अर्जित की है, उससे आपको लोगों के दुखों और बीमारियों को दूर करने में पथ प्रदर्शक बनना चाहिए।

इस अस्पताल में दिल्ली और पड़ोसी राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए आते हैं । वे इस अस्पताल में इस अटल विश्वास के साथ आते हैं कि आधुनिक चिकित्सा की सहायता से वे ठीक हो जाएंगे । अत्यंत गरीब लोग भी इस अस्पताल में आते हैं । ये वे लोग होते हैं जिन्हें न केवल आपके ज्ञान और कौशल की बल्कि आपके प्यार और सहानुभूति की भी आवश्यकता होती है । साथ ही , ये वे लोग होते हैं जो आपको भगवान के बाद दूसरा स्थान देते हैं और आपको मानव शरीर के रहस्यों और आयुर्विज्ञान की नवीनतम प्रगति के बारे में अपने ज्ञान को और बढ़ाने का मौका देते हैं।

मुझे विश्वास है कि आपको एक बहुत ही कुशल शिक्षक संकाय और एक विश्व स्तरीय स्नातकोत्तर शिक्षण कार्यक्रम और अनुसंधान सुविधा के अंतर्गत प्रशिक्षित किया गया है। ज्ञान के इस मंदिर में, आपने आधुनिक चिकित्सा प्रोद्योगिकी का अनुभव लिया है, अंग प्रत्यारोपण, अंग पुन: प्रत्यारोपण, नवजात शल्यचिकित्सा, मस्तिष्क और हृदय शल्यचिकित्सा जैसी अत्याधुनिक शल्यचिकित्सा देखी है, चुनौतीपूर्ण बीमारियों की जांच और उपचार में भाग लिया है ।

निश्चित रूप से, जो ज्ञान आपने यहां प्राप्त किया है वह आपको भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना करने के लिए समर्थ बनाएगा । मैं आप सभी को पीजीआईएमईआर और डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल जैसी विख्यात संस्थाओं के छात्र होने के लिए बधाई देता हूं ।

कल जब आप करियर बनाने के लिए इन संस्थाओं से बाहर निकलेंगे , तो आपको अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करना होगा । इस विशाल देश में, अच्छे डॉक्टर के लिए अवसर बहुत सारे हैं। आपके विकल्प भी उतने ही हैं । आप एक चिकित्सक, सर्जन, शोधकर्ता, एक स्वास्थ्य परिचर्या प्रशासक या फोरेंसिक जांचकर्ता हो सकते हैं। आपकी पसंद चाहे जो भी हो, नैतिकता का पालन करें और सीखते रहें ताकि आप हमेशा आयुर्विज्ञान में नवीनतम प्रगति से परिचित रह सकें । याद रखें कि यह नेक व्यवसाय विज्ञान और मानवता का एक अद्वितीय मिश्रण है । किसी रोगी के इलाज के दौरान कभी भी अपने मानवीय पहलू को न छोड़ें ।

आप एक हेल्दी इंडिया के प्रवर्तक हैं । आपके सभी भावी प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं!

धन्यवाद। जय हिन्द!"