16 मई, 2018 को रायपुर, छत्तीसगढ़ में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

रायपुर, छत्तीसगढ़ | मई 17, 2018

"कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी, मंच पर उपस्थित छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रीगण, स्थानीय सांसद श्री रमेश बैस, विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रो. (डॉ.) एम.एस. परमार, विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद, विद्यापरिषद, अध्ययन संकाय एवं शोधपीठ के सम्माननीय सदस्यगण, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अतुल तिवारी, प्राध्यापकगण, उपस्थित अतिथिगण, स्वर्णपदक एवं प्रिय छात्र-छात्राओं, देवियों और सज्जनों।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होने पर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

मैं सर्वप्रथम स्व. कुशाभाऊ ठाकरे जी को नमन करता हूं।

स्व. ठाकरे जी ने सादा जीवन और उच्च विचार के सूत्र को जीवन भर अपनाए रखा। उन्होंने अपना सारा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

यह मेरा सौभाग्य है कि ऋषितुल्य स्व. ठाकरे जी के साथ कार्य करने का सुअवसर मुझे प्राप्त हुआ था।

इसके साथ ही मैं इस राज्य के रचयिता, हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को प्रणाम करता हूं, जिनके हाथों इस विश्वविद्यालय का उद्घाटन हुआ था।

मुझे इस बात की भी अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि कवि, पत्रकार एवं राजनेता माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की कालजयी कविता “कदम मिलाकर चलना होगा” को विश्वविद्यालय ने अपना कुलगीत बनाया है। यह कुलगीत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को न सिर्फ विद्यार्थी जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है, बल्कि यह उनके समूचे व्यक्तित्व को गढ़ने में भी मदद करता है।

आज जब हम मीडिया के माध्यम से देख-सुन और पढ़ रहे हैं, कि किस तरह विश्व के अनेक हिस्सों में अनेक समूहों के मध्य विभिन्न मतभेदों के दुष्परिणाम हिंसा और उपद्रवों के तौर पर सामने आ रहे हैं, तब अटलजी की इस कविता में समाहित दर्शन “कदम मिलाकर चलना होगा” को अपनाने की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।

किसी विश्वविद्यालय का मोनोग्राम उसके दर्शन का परिचय होता है।

आपके मोनोग्राम में बहुत ही सुंदर ढंग से एकतारा और खड़ताल दर्शाए गए हैं, जो हमारे देश के प्रथम संप्रेषक या पत्रकार देवर्षी नारद का प्रतीक है। वास्तव में, आज भी देश के ग्रामीण अंचलों में इसी एकतारे और खड़ताल के माध्यम से संदशों का प्रभावी संचार होता है।

मुझे बताया गया है कि विगत दिनों विश्वविद्यालय ने अपना चौदहवां स्थापना दिवस मनाया। किसी विश्वविद्यालय के जीवन में यह अत्यंत अल्प अवधि कही जाएगी। परंतु इस छोटी सी अवधि में विश्वविद्यालय ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

देश के नवोदित राज्य छत्तीसगढ़ में स्थापना के कुछ समय बाद ही देश के प्रथम मीडिया गुरुकुल के तौर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय की स्थापना की गई और यह विश्वविद्यालय मीडिया शिक्षा में स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर, एम.फिल. और पीएच.डी. की शिक्षा प्रदान कर रहा है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए मैं विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देता हूं।

पत्रकारों और पत्रकारिता ने हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम में महती भूमिका निभाई थी।

उस दौर के लगभग सभी बड़े नेता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर समाचार पत्रों के माध्यम से जनता में जागरुकता पैदा करने की दिशा में प्रयासरत थे।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात समाचार पत्रों एवं संचार के अन्य माध्यमों की भूमिका और भी बढ़ गई है। समाचार माध्यम लोगों को सूचना देने, शिक्षित करने और मनोरंजन का कार्य कर रहे हैं।

जहां शहरों एवं महानगरों में रहने वाले लोग संचार के अत्याधुनिक साधनों का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं हमें यह ध्यान रखना होगा, कि देश के कई हिस्सों में अभी भी जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत हमारे बंधुओं की पहुंच इन आधुनिक साधनों तक नहीं हो सकी है।

ऐसा माना जाता है कि सूचना व्यक्तियों को सामर्थ्यवान बनाती है। इस मायने में सूचना सशक्तीकरण का माध्यम है। सही सूचनाएं प्राप्त होने पर आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

मीडिया के जो विद्यार्थी अपनी शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात आज यहां उपाधि प्राप्त कर रहे हैं तथा जो विद्यार्थी अभी अध्ययनरत हैं, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि वे समाज में सूचना के संप्रेषण का कार्य पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी से करें।

आज भी हमारे देश के अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं और पिछड़े वर्गों के करोड़ों लोगों तक सूचनाएं सही मायने में, सही संदर्भों के साथ और सही समय पर पहुंचाए जाने की आवश्यकता है।

इस महती कार्य को सफलतापूर्वक करके आप एक समरस समाज की स्थापना में अपना योगदान दे सकते हैं। एक ऐसा समाज, जहां सूचनाओं के अभाव में कोई अवसरों से वंचित नहीं रह पाएगा।

हाल के वर्षों में यह भी देखा गया है कि समाचार माध्यम न सिर्फ सूचनाएं प्रेषित कर रहे हैं, बल्कि वे एजेंडा तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

समाचार माध्यम लोकतंत्र के तीनों स्तंभों के साथ ही नागरिकों के समक्ष भी एजेंडा प्रस्तुत कर रहे हैं।

मीडिया की इस नई भूमिका की कुछ वर्गों में प्रशंसा की गई, तो कुछ वर्गों ने इसकी आलोचना भी की है। इस बिंदू पर निष्पक्ष तौर से सोचा जाए, तो यह बात निकलकर आती है कि जनता की भलाई के लिए, जनहित के लिए मीडिया यदि एजेंडा प्रस्तुत करता है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।

Media should be a Means of Empowerment for Development through Informed Actions. It should enrich the thought processes and promote a positive mindset. It should be critical of the ills in society and heighten awareness of the social maladies afflicting contemporary society like casteism, communalism, corruption and atrocities against women.

इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि सूचनाएं प्रेषित करने तथा एजेंडा निर्धारित करने का दायित्व किन हाथों में है। हम सभी भली भांति जानते हैं कि समाचार पत्रों का प्रकाशन एक मिशन से बदलकर उद्योग का रूप ले चुका है।

जहां भारत में पिछले 25 वर्षों के दौरान टीवी चैनलों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं प्रौद्योगिकी के विकास के साथ स्मार्ट फोन की मदद से बमुश्किल पिछले 5 वर्षों में डिजिटल मीडिया हम सभी के हाथों में पहुंच चुका है।

ऐसी स्थिति में जब हम सभी सूचनाएं गढ़ने, प्रेषित करने और उसे प्राप्त करने की क्षमता रखते हैं, तब हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

Media should dedicate itself to a new TRP philosophy: The Promotion of Truth in a Responsible and Professional Manner.Harmonization of rights and responsibilities is needed for a free media to flourish.

उचित और अनुचित में भेद करने का दायित्व हम सभी का है।

इस दौर में इस विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों से प्रशिक्षित होकर समाज में अपनी भूमिका निभाने जा रहे छात्र-छात्राओं को विवेकशील बनना होगा।

उन्हें इस बात का हमेशा ध्यान रखना होगा कि उनके लिखे एक-एक शब्द का महत्व कितना अधिक है।

Information with confirmation can become the most powerful ammunition to fight against injustice, social evils and the negative forces in the world.

आपके इन्हीं शब्दों के माध्यम से या तो समाज में समरसता कायम हो सकती है या फिर समाज में विषमताएं बढ़ सकती हैं।

यहां पर मैं आपके विश्वविद्यालय के मोनोग्राम में उल्लेखित ऋग्वेद की ऋचा की ओर आपको ले जाना चाहूंगा। “भद्रं नोअपि वातय मनो दक्षमुत क्रतुम।” अर्थात हे देव हमारे मन को शुभ संकल्प वाला बनाओ, हमारी अंतरात्मा को शुभ कर्म करने वाली बनाओ और हमारी बुद्धि को शुभ विचार करने वाली बनाओ।

This attitude to do your best for your country is going to make all the difference in your careers. I have always felt that one should always remember and revere one’s mother, motherland, mother tongue and motivational mentor or guru.

दीक्षांत समारोह की इस वेला में आप सभी प्रण लें, कि अपने कर्मों से न सिर्फ अपना बल्कि अपने माता-पिता, गुरुजनों, समाज और राष्ट्र का मान बढ़ाएं।

अंत में, मैं एक बार फिर आप सभी को तृतीय दीक्षांत समारोह की हार्दिक बधाइयां देता हूं, विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं देता हूं और इस शुभ अवसर पर आपने मुझे आमंत्रित किया, उसके लिए हृदय से आपको धन्यवाद देता हूं।

जय हिन्द !