11 फरवरी, 2018 को हैदराबाद में दक्षिण एशियाई बीमा विनियामकों की चौथी बैठक तथा अंतरराष्ट्रीय बीमा सम्मेलन के विदाई सत्र में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया अभिभाषण

हैदराबाद | फ़रवरी 11, 2018

"मुझे दक्षिण एशियाई बीमा विनियामकों की चौथी बैठक तथा अंतरराष्ट्रीय बीमा सम्मेलन के इस विदाई सत्र में भाग लेकर प्रसन्नता हो रही है। मुझे बताया गया है कि विचारों का आदान-प्रदान करने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने के लिए दक्षिण एशियाई देशों के बीमा विनियामकों की बैठक 2013 से होती आ रही है। नि:संदेह, यह मंच विनियामक ढांचों, बाजार अवसंरचना को बेहतर तरीक से समझने और सामान्य हित के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग बनाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

मुझे विश्वास है कि इस बैठक के सहभागियों ने सहयोग के माध्यम से दक्षिण एशिया के सम्पूर्ण क्षेत्र में एक स्थिर और समावेशी वित्तीय क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी उपायों और विनियामकों की विभिन्न सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर चर्चा की है और इससे संबंधित जानकारी एक-दूसरे से साझा की है।

विगत पाँच सौ वर्षो में बीमा एक प्रभावी जोखिम-प्रबंधन कार्यनीति के रूप में उभरकर सामने आया है जो व्यक्तियों और संस्थाओं को आकस्मिक परिस्थितियों के कारण हुई वित्तीय हानि से बचाता है।

बीमा-कार्यक्रम में अंशदान देने वाली बहुत-सी ग्राहक संस्थाओं से एकत्र की गई निधि का उपयोग घाटा उठाने वाले कुछ ग्राहकों की भरपाई के लिए किया जाता है।

चूंकि फसलों का भारी नुकसान, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति और वित्तीय मंदी जैसी जीवन में बहुत सी अनिश्चितता भरी और आकस्मिक आपदायिक घटनाएं होती रहती हैं, ऐसे में बीमा घाटों से उबरने और उसके प्रभाव को कम करने के लिए एक उपयोगी तंत्र बन गया है।

यह एक महत्वपूर्ण वित्तीय सेवा और उद्यम बनकर उभरा है।

जैसे-जसै ग्राहकों की संख्या बढ़ती है और बीमा एक उद्योग का रूप लेता है, विनियमन की आवश्यकता उत्पन्न हो जाती है। धोखाधड़ी और नैतिक पतन को रोकने की जरूरत है। प्रीमियम का भुगतान करने वाले ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की आवश्यकता है। एक तरह से विनियामक यह सुनिश्चित करता है कि तंत्र निष्पक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी हो।

वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप नई और उभरती हुई चुनौतियां और अप्रत्याशित अनिश्चितताएं सामने आई हैं।

आज बीमा विनियामकों की बहुत ज्यादा जरूरत है। विनियामकों को भी आपस में सम्पर्क बनाने और सहयोग करने की भी आवश्यकता है क्योंकि हम एक बहुत ज्यादा आपस में जुड़े और परस्पर निर्भर रहने वाले विश्व में रह रहे हैं।

इसलिए, ज्ञान और अच्छी प्रक्रियाओं को साझा करने के लिए सहयोग हेतु दक्षिण एशियाई क्षेत्र में विनियामकों के बीच इस तरह की वार्ता एक स्वागतयोग्य कदम है। बीमा कंपनियों के साथ-साथ विनियामकों को भी बदलते समय के साथ विकसित होने की जरूरत है। तथापि, मुख्य ध्यान अनुचित व्यापार प्रक्रियाओं पर रोक लगाने और आम आदमी के लिए वहनीय मूल्य पर पॉलिसियां तथा उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर होना चाहिए।

यद्यपि 'सार्क' देश अपने आकार, जनसंख्या और अर्थव्यवस्था की दृष्टि से अलग-अलग हैं तथापि इन राष्ट्रों में बहुत-सी समानताएं हैं और इनकी समस्याएं और आवश्यकताएं एक-जैसी हैं। वृद्ध होती जनसंख्या, प्राकृतिक आपदाओं का बार-बार आना और एक-समान चिकित्सा देखभाल सुविधाओं की कमी 'सार्क' देशों की कुछ चुनौतियां एक-जैसी हैं। उतना ही महत्वपूर्ण बीमा की व्यापक पैठ की आवश्यकता है क्योंकि कुछ ही प्रतिशत जनसंख्या के पास बीमा की सुविधा है।

मुझे विश्वास है कि यहां एकत्रित प्रतिभागियों और अन्य विशेषज्ञों ने विनियामक परिवेश के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ दक्षिण एशियाई देशों में बीमा की उपलब्धता में सुधार की आवश्यकता पर भी जरूर चर्चा की होगी।

ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु-परिर्वतन के कारण कृषि के बहुत ज्यादा अनिश्चित होने और खेती पर निर्भर विशाल जनसंख्या की बढ़ती असुरक्षा के कारण, बीमा के माध्यम से उन्हें प्रदान की गई सुरक्षा घेरा को व्यापक और विविध जरूर होना चाहिए।

बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे चक्रवात, बेमौसम भारी वर्षा और सूखा, आपदा और विनाश के मद्देनजर बीमा कंपनियों और विनियामकों को अपने एजेंडें में बीमा को प्रथम स्थान देना चाहिए। मुझे यह देखकर खुशी है कि किसानों के लिए, जिन्हें प्रौद्योगिकी की सहायता प्राप्त है, फसल बीमा योजना प्रदान किया जाना चर्चा के विषयों में से एक रहा है।

भाइयों और बहनों!

साइबर अपराधियों द्वारा महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील आँकड़े चाहे वो संगठनों के हों या व्यक्तियों के हों- हैक किए जाने और चुराने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर साइबर सुरक्षा और साइबर दायित्व बीमा वर्तमान समय में बहुत जरूरी हो गया है।

कुछ आकलनों के अनुसार, 2017 में आँकड़ो की चोरी का वैश्विक औसत मूल्य 3.2 मिलियन डॉलर था और कंपनियों के रिकार्ड के संबंध में प्रत्येक चोरी किए गए आँकड़े का औसत मूल्य 141 डॉलर माना जा रहा है। इसे यह साफ है कि बीमाकर्ताओं के समक्ष साइबर जोख़िम-प्रबंधन संबंधी चुनौतियां सामान्य व्यावसायों की तुलना में बिल्कुल अलग होंगीं। बीमा कंपनियों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि आँकड़ो की चोरी छोटे व्यवसायों को कारोबार से बाहर कर सकती है।

बीमा के माध्यम से स्वास्थ्य-देखभाल सेवा की सुलभता सुनिश्चित करना एक दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिस पर बीमा कंपनियों और विनियामकों को ध्यान देना चाहिए। सिर्फ इस बात पर जोर नहीं होना चाहिए कि सभी कमजोर तथा वंचित वर्गों को शामिल किया जाए, बल्कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता और बीमा धारकों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

विगत तीन वर्षों के दौरान 7.5% की औसत वृद्धि दर्ज कराकर, भारतीय अर्थव्यवस्था अब 2.5 ट्रिलियन डॉलर की विश्व में सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। क्रय-शक्ति समतुल्यता के आधार पर आज यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

मुझे खुशी है कि भारत व्यवसाय करने को और आसान बनाने के लिए समन्वित कार्रवाई कर रहा है और यह इज ऑफ डूइंग बिजनेस में पिछले वर्ष के 130वें स्थान से 2018 में 100वें स्थान पर आ गया है।

विश्व बैंक ने अपने 2017 के प्रतिवेदन में इस बात की पुष्टि की है कि उच्च आर्थिक वृद्धि-दर, मजबूत राजकोषीय समेकन और चालू खाते का कम घाटा, कृषि संबंधी उच्च उत्पादन, बढ़ता एफडीआई, निम्न मुद्रास्फिीति और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च मजदूरी दर के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार बहुत मज़बूत है।

देश ग्रामीण रोजगार की गॉरंटी , सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा और समावेशी विकास के संवर्धन हेतु कार्यनीतियों सहित सामाजिक सुरक्षा के अनेक उपायों पर भी ध्यान केन्द्रित कर रहा है।

विगत दशक के दौरान जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत की औसत-वृद्धि दर और विगत तीन वर्षों के दौरान 7.1 प्रतिशत से ज्यादा के औसत के साथ, मजबूत आर्थिक वृद्धि के कारण देश में प्रयोज्य आय के स्तर में लगभग तीन गुणा की वृद्धि हुई है।

भारतीय बीमा क्षेत्र का पैठ-दर वैश्विक औसत के 6.2 प्रतिशत की तुलना में 3.39 प्रतिशत है। इसमें वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं और विकासशील मध्यम वर्ग के कारण भविष्य बहुत उज्ज्वल दिखाई दे रहा है। प्रयोज्य आय में वृद्धि और बीमा कवरेज के संबंध में व्यापक जागरूकता और प्रयोज्य आय में इस वृद्धि को कुल घरेलू बचत में वृद्धि से जोड़ा जा रहा है और इसके परिणामस्वरूप वित्तीय उत्पादों और बीमा जैसे जोखिम प्रबंधन समाधानों की मांग में बढ़ोत्तरी हुई है।

मूडीज इनवेस्टरर्स सर्विस के अनुसार, भारत में हुए नवीनतम विनियामक सुधार से भारतीय प्राथमिक बीमाकर्त्ताओं द्वारा देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि-दर का लाभ उठाने की क्षमता में वृद्धि हुई है।

नवम्बर 2017 में प्रकाशित उनके प्रतिवेदन के अनुसार, 2015 से लागू किए गए विनियामकों से बीमाकर्त्ताओं की पूंजी और पुन: बीमा कवर तक पहुंच सरल हुई है और साथ ही इनसे उन्हें अपनी निवेश-आस्तियों और आरक्षित प्रचुरता की गुणवत्ता में सुधार को बढ़ावा मिला है।

इन गतिविधियों से भारतीय बीमाकर्ताओं को धीरे-धीरे भारत के मजबूत आर्थिक विस्तार से ज्यादा फ़ायदा उठाने और बीमा को वर्तमान निम्न स्तर से ऊपर उठाने को मौका मिलेगा।

नि:सन्देह कवरेज में वृद्धि तभी होगी जबकि बीमाकर्ता ऐसे उत्पाद लेकर आएंगे जो मध्यम और निम्न आय वर्गों के लिए अनुकूल हो। ऐसा होने के लिए उत्पाद को कम मूल्य का होना चाहिए और वह इतना सरल हो कि अधिकांश जनसंख्या की समझ में आ जाए तथा ये देश-भर में आसानी से उपलब्ध हों।

मुझे यह बताते हुए खुशी है कि भारत में बीमा-क्षेत्र ने देश के आर्थिक विकास में भारी योगदान किया है। वर्ष 2016-17 के अन्त तक बीमा कंपनियों द्वारा किया गया निवेश 30,76,537 करोड़ रूपये था, जिसमें 2,40,000 करोड़ रूपये से ज्यादा का निवेश अवसंरचना में किया गया। बीमा कंपनियों ने दीर्घकालीन विकासात्मक परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण निवेश किया है और इस तरह से उन्होंने राष्ट्र-निर्माण प्रक्रिया में प्रभावी योगदान किया है।

यह नोट किया जाना चाहिए कि बीमा उद्योग ने पिछले कुछ दशकों में भारी वृद्धि दर्ज़ की है। चूंकि देश उच्च आर्थिक वृद्धि के लिए तैयार है, इसलिए इस क्षेत्र में वर्ष 2020 तक 280 बिलियन अमरीकी डॉलर की वृद्धि की संभावना है। वर्ष 2005 में बीमा बाजार 23 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2017 में 84.72 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया। एफडीआई में वृद्धि और किसानों सहित लोगों को बीमा कवर प्रदान करने संबंधी सरकार की योजनाओं ने देश में बीमा की पैठ बढ़ाकर इस उद्योग को बढ़ावा दिया है।

मुझे आशा है कि दस करोड़ परिवारों को बीमा कवरेज प्रदान करने के लिए हाल में घोषित की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना से बीमा उद्योग के विस्तार को और ज्यादा गति मिलेगी और बहुत से गरीब परिवारों के भारी वित्तीय जोख़िम कम होंगे। इसके अतिरिक्त, अनेक राज्य सरकारों ने भी अनेक अन्य बीमा योजनाओं को भी प्रायोजित किया है जिससे जनसंख्या के विभिन्न वर्गों को कवरेज मिलता है।

मुझे यह बताते हुए खुशी है कि भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) बीमा कंपनियों के लिए दिशानिर्देश तैयार करके, बीमा उद्योग के योजनाबद्ध विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। सतत विकास के लिए बाजार का सही तरीके से विनियमित होना जरूरी है और मुझे विश्वास है कि आईआरडीए यह सुनिश्चित करने के लिए सभी ज़रूरी उपाय कर रहा होगा।

मुझे आईआरडीए के इस अत्याधुनिक नए हरित भवन, जिसका निर्माण 165.73 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से किया गया है, को राष्ट्र को समर्पित करते हुए बहुत खुशी हो रही है।

मुझे विश्वास है कि इस दो-दिवसीय सम्मेलन की सिफारिशों से दक्षिण एशियाई देशों में विनियामक ढांचे में और सुधार लाने में प्राधिकरणों को सहायता मिलेगी एवं वे और ज्यादा कुशल, पारदर्शी तथा समावेशी बन पाएंगें तथा बीमा कंपनियों को जनसंख्या की अनुभूत जरूरतों को पूरा करने वाले निम्न लागत वाले तथा आसानी से उपलब्ध उत्पाद लाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

जय हिन्द!"