10 नवम्बर, 2017 को नागपुर में नौवें एग्रोविजन के उद्घाटन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नागपुर | नवम्बर 10, 2017

'एग्रोविजन' द्वारा आयोजित इस वृहत प्रदर्शनी में उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

मैं जानता हूं कि यह कार्यक्रम प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है और लाखों किसान इस कार्यक्रम में आते हैं और आधुनिक प्रौद्योगिकी की प्रदर्शनी के साथ-साथ यहां आयोजित इन प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और सम्मेलनों से जानकारी प्राप्त करते हैं।

मेरे लिए यह अत्यंत संतुष्टि का विषय है कि आप कृषि के विविध क्षेत्रों के संबंध में नि:शुल्क कार्यशालाओं का आयोजन करके किसानों को शिक्षित करते हैं जिससे कि वे कृषि क्षेत्र के माध्यम से अपना जीवन बेहतर बना सकें। प्रासंगिक मुद्दों पर विशेष सम्मेलनों का आयोजन करना एक अन्य प्रशंसनीय क्रियाकलाप है जो इस क्षेत्र में कृषि-उद्यमियों को आकर्षित करते हैं।

मैं इस बात में दृढ़ विश्वास रखता हूं कि जब तक उत्पादक से लेकर उपभोक्ता तक एक मूल्य श्रृंखला तैयार नहीं होगी तब तक खेती की लाभप्रदता में सुधार नहीं होगा। इसलिए, इस तरह के कार्यक्रम कृषि की मौजूदा स्थिति को बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

विदर्भ और इसके आस-पास के क्षेत्र बहुत कम सिंचाई सुविधाएं होने के कारण मुख्यत: वर्षा पर आश्रित हैं। तथापि, यह क्षेत्र उपजाऊ मिट्टी, सूरज की अच्छी रोशनी और परिश्रमी किसानों से संपन्न है।

पिछले कुछ वर्षों से यहां पर कृषि संकट की स्थिति बनी हुई है। कृषि क्षेत्र की लाभप्रदता में कमी आई है। इसके मुख्य कारण मध्यम एवं छोटे आकार की जोत और बाजार तक बहुत कम पहुँच का होना है। इस संकट का अन्य कारण कुछ ही फसलों पर अत्यधिक निर्भरता और फसल विविधीकरण का अभाव भी है।

अगर किसानों की आय को बढ़ाना है तो उन्हें बागवानी, पशुपालन, प्रसंस्करण और ऐसे अनेक संबद्ध क्षेत्रों की ओर अग्रसर होना होगा।

कृषि क्षेत्र में विविधता लाने और मूल्य श्रृंखला के निर्माण की जरूरत को महसूस करके, स्वप्नदृष्टा नेता और 'एग्रोविजन' के मुख्य पैट्रन, श्री नितिन गडकरी जी ने लगभग एक दशक पहले इस क्षेत्र में किसानों को शिक्षित करने, नई-नई पद्धतियां अपनाने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए एक मंच की आवश्यकता पहचानी। आज इस कार्यक्रम का नौवां अवसर इसकी सफलता का प्रमाण है।

मुझे खुशी है कि 'एग्रोविजन' के माध्यम से आधुनिक कृषि पद्धतियों और नई प्रौद्योगिकियों के बारे में किसानों को शिक्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यहाँ किसान, शोधार्थी, उद्यमी, नीति निर्माता और कृषि से संबंधित अन्य हितधारक कृषि के क्षेत्र में होने वाले विभिन्न परिवर्तनों और वर्तमान चुनौतियों पर आमने-सामने विचार करने और चर्चा करने आते हैं।

एग्रोविजन मध्य भारत के सबसे बड़े कृषि सम्मेलन के रूप में उभरा है और कृषि को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और स्थायी पेशा बनाने में किसानों के आत्मविश्वास को सुदृढ़ कर रहा है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान जैसे राज्यों के किसान और अन्य नजदीकी राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के किसान भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।

कृषि इस महान देश की संस्कृति है और लगभग बावन प्रतिशत लोग अपने जीवनयापन के लिए कृषि पर सीधे निर्भर हैं। इस राष्ट्र की समृद्धि कृषक समुदाय की बेहतरी से जुड़ी हुई है और स्वाभाविक ही उन्हें स्थायित्व और लाभ प्राप्ति हेतु आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के संबंध में जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। एग्रोविजन के प्रयास अत्यंत सराहनीय है और देश भर में ऐसे प्रयास दोहराए जाने चाहिए।

इस देश के किसानों ने हरित, श्वेत और नीली क्रांति जैसी कई क्रांतियों के माध्यम से खाद्य पदार्थ, दूध, सब्जियों, फलों, कपास, चीनी और कई अन्य कृषि उत्पादों के क्षेत्र में राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाया है।

दुर्भाग्यवश उत्पादन में हुई वृद्धि के अनुपात में किसानों की आय में वृद्धि नहीं हुई है।

ऐसा महज प्राथमिक उत्पाद पर जोर देने और कृषि उपज को बाजार तथा प्रसंस्कृत उत्पादों के विकास से न जोड़े जाने के कारण हुआ है।

आगामी क्रांति मूल्य श्रृंखला के विकास तथा प्राथमिक उत्पादक, हमारे किसानों तक उसका लाभ पहुंचाने से संभव होगी।

अत: कृषि को लाभप्रद बनाने के लिए उद्यमिता विकास को कृषि प्रक्रिया का अभिन्न अंग होना चाहिए। मुझे बताया गया है कि 'एग्रोविजन' कृषि उपज को प्रसंस्करण और विपणन से जोड़े जाने पर बल देता है और इसलिए इस कार्यक्रम में किसानों के साथ-साथ कई उद्यमियों को भी आमंत्रित किया गया है।

मैं इस वृहद् कार्यक्रम के आयोजन में शामिल सभी लोगों को बधाई देता हूँ।

विगत में, विदर्भ को कपास, सोयाबीन और संतरे की फसलों के लिए जाना जाता था परंतु हाल के वर्षों में गन्ना, चावल, दाल, अनार, हल्दी, अदरक जैसी अन्य फसलों का यहां उल्लेखनीय उत्पादन हुआ है।

इस आयोजन के वास्तविक प्रभाव का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि अनेक किसान अब अनार, शरीफ़ा, आंवला, ड्रेगन फ्रूट और शुष्क भूमि में उपजाए जाने वाले अन्य फलों का उत्पादन कर रहे हैं और कृषि से अच्छा लाभ कमा रहे हैं। इस प्रभाव के वर्तमान मूल्यांकन से पता चला है कि पिछले पांच वर्षों में इस क्षेत्र में जहां वर्ष 2010-11 में केवल 100 एकड़ में अनार की खेती की जाती थी, वहीं अब यह विदर्भ के सभी पश्चिमी जिलों में 5000 एकड़ क्षेत्र तक पंहुच चुकी है। दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। गन्ने की खेती और चीनी के उत्पादन से किसानों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

'एग्रोविजन' कृषि के विविधीकरण के बारे में जागरूकता फैलाने के अपने उद्देश्य में सफल रहा है। किसान कपास - सोयाबीन, मोटे अनाजों की खेती को छोड़ रहे हैं और डेयरी, बागवानी, रेशम-कीट पालन, मधुमक्खी पालन, फूलों की खेती और पॉलीहाउस कृषि की ओर जा रहे हैं। हमारे राष्ट्र-निर्माताओं ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जो समृद्ध, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील हो। एग्रोविज़न इस अभियान को आगे ले जाने के लिए इसी प्रकार का दृष्टिकोण रखता है। स्वदेश आधारित खाद्य सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए, हमें एक कारगर कृषि पारिस्थितिकी-तंत्र सृजित करना होगा।

ज्ञान को साझा करना और नई प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना इस पारिस्थितिकी-तंत्र का एक अभिन्न और मुख्य भाग है। मैं श्री गडकरी जी, जिन्होंने इस पहल की शुरुआत की और इस कार्यक्रम के आयोजकों को भारतीय कृषि को पुनरूज्जीवित करने के लिए बधाई देना चाहता हूँ।

किसानों के जीवन में सुधार लाने के लिए गहन कृषि और फसल विविधीकरण तथा खेत से लेकर बाजार तक फसलों का प्रसंस्करण करना आवश्यक है।

उत्तरोत्तर सरकारें निरंतर पारिस्थितिकी को मजबूत बनाने के अनेक सुधारात्मक उपाय करती रही हैं परंतु मैं समझता हूँ कि और अधिक समयबद्ध, व्यवस्थित और प्रणालीगत प्रयासों की आवश्यकता है। नि:सन्देह सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण कारक है।

सिंचाई के अलावा, सरकार अभी से ग्रामीण सड़कों, भरोसेमंद गुणवत्तायुक्त विद्युत-आपूर्ति, गोदामों, शीतागार सुविधाओं, प्रशीतित वाहनों और बाजार स्थलों जैसी अवसंरचना पर ध्यान केन्द्रित कर रही है।

विस्तृत पारिस्थितिकी के दो अन्य महत्वपूर्ण निर्माण आधार सस्ती ब्याज दर पर समय पर ऋण की सुविधाएं और कृषक-अनुकूल बीमा पॉलिसियां हैं। इनसे किसान बेहतर, आय कमाने वाली फसलों और कृषि कार्यों में निवेश करने में समर्थ बनते हैं और अपनी आय में वृद्धि कर पाते हैं। बीमा सुरक्षा किसानों को अप्रत्याशित जलवायु और प्राकृतिक आपदाओं से बचाती है। किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) सही दिशा में उठाये गये कदम हैं और इन्हें सर्वव्यापी बनाये जाने की आवश्यकता है।

कृषि उत्पादों का विपणन और उनका उचित मूल्य प्राप्त करना अधिकांश किसानों के लिए काफी बड़ी चुनौती है। ई-एनएएम नामक एक नई पहल का उद्देश्य कृषि उत्पाद के लिए एक ई-ट्रेडिंग मंच अपनाकर इस चुनौती का निराकरण करना है।

राज्यभर में एकल-स्थान पर बाजार शुल्क लगाये जाने और एक संयुक्त एकल व्यापार लाइसेंस की शुरूआत करके कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) अधिनियम में भी संशोधन किए जाने का प्रस्ताव किया जा रहा है।

मैं 'एग्रोविजन' को भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक बनाने के लिए जागरूकता बढ़ाने और उसका कायाकल्प करने में एक महत्वपूर्ण कदम मानता हूँ।

मैं यह उम्मीद करता हूँ कि आगामी महीनों में हमारे देश में अन्य राज्यों में ऐसी अनेक पहलें देखने को मिलेंगी।

जय हिंद!