09 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली में भारत के वर्ल्ड मेमोरी स्पोर्ट्स काउंसिल के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का संबोधन

नई दिल्ली | जनवरी 9, 2018

"मुझे यह जानकार खुशी हुई है कि भारतीय टीम ने गत माह शेन्जेन, चीन में आयोजित वर्ल्ड मेमरी चैम्पियनशिप्स में चौथा स्थान प्राप्त किया है।

इस टीम और इसके प्रशिक्षकों को मेरी ओर से बधाइयाँ! मुझे बताया गया है कि मेमरी एथलीट वाली यह युवा भारतीय टीम वर्ल्ड मेमरी स्पोर्ट्स काउंसिल फॉर इंडिया के अध्यक्ष स्क्वाड्रन लीडर जयसिम्हा के मार्गदर्शन में गत छह महीने से मेमरी स्पोर्ट्स के संबंध में प्रशिक्षण ले रही है। मैं आशा करता हूँ कि भारतीय टीम अगली चैम्पियनशिप जीतने में सक्षम होगी।

मेमरी स्पोर्ट्स सहित विभिन्न दिमागी खेल शारीरिक खेलों की ही भांति महत्वपूर्ण हैं और इन्हें बढ़ावा और महत्व दिया जाना चाहिए। निःसंदेह, शरीर की अपनी सीमाएं हैं परंतु दिमाग की क्षमता असीमित है और इसकी क्षमता का पूरा-पूरा उपयोग किया जाना चाहिए।

मुझे लगता है कि दिमागी खेलों को लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए, क्योंकि ये न केवल एकाग्रता के स्तर को ही जबर्दस्त तरीके से बढ़ाते हैं, वरन सृजनशीलता, मानसिक अनुशासन बढ़ाने और जीवन में सफलता अर्जित करने में भी सहायता करते हैं।

स्मरणशक्ति अधिगम का एक आवश्यक अवयव है। तथापि, कोशिश यह होनी चाहिए कि इसे प्राथमिकता मिले। हमें केवल रटंत विद्या और स्मरण विद्या पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय विश्लेषणात्मक और तार्किक चिंतन कौशल की ओर भी उन्मुख होने की आवश्यकता है। विचार सृजन और समझ महत्वपूर्ण हैं।

याद करने के तरीके विकसित किए जाने चाहिए और उन्हें विद्यालयों को पढ़ाया जाना चाहिए ताकि युवा मस्तिष्क पर अनावश्यक दबाव न पड़े। विद्यार्थियों के लिए अधिगम तनावपूर्ण व्यर्थकारी काम होने के बजाय स्मरणीय अनुभव होना चाहिए। रटंत विद्या, माता-पिता की अत्यधिक अपेक्षाएँ, बढ़ती हुई प्रतियोगिता और शैक्षणिक संस्थाओं की ऊंची रैंक प्राप्त करने की ललक विद्यार्थियों में तनाव और चिंता का कारण बन रही हैं।

हमें तनाव झेलने में असमर्थ विद्यार्थियों द्वारा की गई आत्महत्या की खबरें प्रायः मिलती रहती हैं। जब मैं ऐसी खबरें पढ़ता हूँ, तो मुझे काफी पीड़ा होती है, क्योंकि युवाओं की इस तरह से होने वाली मृत्यु को टाला जा सकता है और अब समय आ गया है कि संस्थाएं, सरकारें और समाज व्यापक स्तर पर ऐसे तनावग्रस्त विद्यार्थियों को सहयोग और सांत्वना प्रदान करके आत्महत्या की घटनाओं को रोकें। वे रटंत विद्या प्रणाली के तहत मूल अवधारणा को समझे बिना ही परीक्षाओं में लिखने भर के लिए याद कर लेते हैं।

मुझे बताया गया है कि मेमरी प्रशिक्षण अध्ययन-प्रक्रिया को एक तनावपूर्ण दुःस्वप्न बनाने के बजाय एक सुखद अनुभव बनाएगा। यदि विद्यार्थी मेमरी तकनीक सीखकर उसमे महारत हासिल कर लेते हैं तो वे काफी दक्षता और चतुराई के साथ अपने कार्य को अंजाम दे सकते हैं। इससे वास्तव में विद्यार्थियों को बेहतर ग्रेड हासिल करने और उन्हें अन्य पाठ्येत्तर गतिविधियों के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है, जो अंततः उनके समग्र विकास में सहायक होगा।

मित्रों, भारत को यह जनांकिकीय लाभ मिला हुआ है कि इसकी 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष की आयु समूह की है। अतः हमारी शिक्षण प्रणाली का आमूलचूल परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता है, ताकि देश के युवा विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, चिकित्सा और इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल कर सकें और नई-नई खोज कर सकें।

अच्छी स्मरणशक्ति की आवश्यकता केवल शैक्षिक क्षेत्रों में ही नहीं, वरन हमारे वृत्तिक कैरियर में भी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारी उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ती जाती है, हम लोगों के नाम, चेहरे, दूरभाष संख्या भूलने लगते हैं और अनेक बुजुर्ग लोग अल्जाइमर रोग, डिमेन्शिया या शून्यचित्ति के भी शिकार हो जाते हैं। अतः, प्रत्येक भारतीय के लिए यह आवश्यक है कि वह इन मेमरी तकनीकों को सीखे और एक स्वस्थ दिमाग पाने के लिए नियमित आधार पर स्मरण शक्ति बढ़ाने वाले खेलों का अभ्यास करे।

मुझे बताया गया है कि वर्ल्ड मेमरी स्पोर्ट्स काउंसिल शब्दों को याद रखने, संख्याओं को याद रखने, प्लेईंग कार्ड को याद रखने, नामों और चेहरों को याद रखने, अमूर्त छवियों को याद रखने, दहाई अंकों को याद रखने और उच्चारित संख्याओं को याद रखने सहित 10 विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिवर्ष मेमरी चैम्पियनशिप का आयोजन करता है।

मैं एक बार पुनः भारतीय टीम को अपनी शुभ कामनाएँ देता हूँ।"