चरित्र, योग्यता, क्षमता, आचरण, करूणा, कड़ी मेहनत और अनुशासन सफलता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण गुण हैं: उपराष्ट्रपति एस आर एम विश्वविद्यालय के विशेष दीक्षांत समारोह, 2017 में माननीय उपराष्ट्रपति का अभिभाषण

चेन्नई
नवम्बर 23, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि सफलता प्राप्त करने और सपनों को साकार करने के लिए चरित्र, योग्यता, क्षमता, आचरण, करूणा, कड़ी मेहनत और अनुशासन महत्वपूर्ण गुण हैं। वह आज चेन्नई, तमिलनाडु में एस आर एम विश्वविद्यालय के विशेष दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल, श्री बनवारीलाल पुरोहित, तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री, श्री के. पी. अन्बालगन तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में उच्च शिक्षा का लक्ष्य देश के मानव संसाधन की क्षमता का समान एवं समावेशी रूप से पूर्ण उपयोग करना है। उन्होंने आगे कहा कि इसका मुख्य अभिप्राय सभी वर्गों, विशेषकर समाज के कमजोर वर्गों तक उच्च शिक्षा की अधिकाधिक पहुँच सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में उच्च शिक्षा अपने अप्रत्याशित विस्तार के दौर से गुजर रही है जिसके अंतर्गत छात्रों और संस्थानों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है और सरकारी वित्तपोषण में भी भारी वृद्धि हुई है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी युवा आबादी को राष्ट्रीय पूँजी बनाने की दिशा में शिक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हमारे देश की युवा आबादी का सशक्तीकरण होता है, तो वे आने वाले वर्षों में बहुत मजबूत और उपयोगी कार्यबल साबित हो सकती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक समय भारत को 'विश्वगुरू' के रूप में जाना जाता था और यह ज्ञान का वैश्विक केंद्र था क्योंकि विश्व के सभी कोनों से ज्ञान प्राप्त करने के इच्छुक लोग यहां आते थे और तक्षशिला, नालंदा तथा शिक्षा के अन्य केन्द्रों में अध्ययन किया करते थे। उन्होंने आगे कहा कि यह स्थिति मुगल आक्रमण और ब्रिटिश उपनिवेशीकरण के बाद बदल गई है और अब समय आ गया है कि भारत एक बार फिर वैश्विक ज्ञान केन्द्र के रूप में उभरे।

उपराष्ट्रपति ने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा, "शिक्षा से मेरा अभिप्राय बाल और मानव के शरीर, मस्तिष्क और आत्मा के सर्वांगीण एवं सर्वोत्तम विकास से है"। "जो शिक्षा चरित्र में बदलाव नहीं करती, वह व्यर्थ है।" उन्होंने यह भी कहा कि जैसा कि महात्मा ने इस बात पर उचित ही बल दिया था कि चरित्र किसी व्यक्ति के लिए सही मार्ग का चयन करने हेतु सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण है।

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